नोडल अधिकारी ने परखी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं: इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का जाना हाल, डॉक्टरों को दी संवेदनशीलता की नसीहत

उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जनपद जालौन के विकास और व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी एवं सचिव (कृषि) इन्द्र विक्रम सिंह ने सोमवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी इकाई का औचक निरीक्षण किया। स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत जानने के लिए उन्होंने न केवल दस्तावेजों की जांच की, बल्कि खुद मरीजों के बेड तक जाकर उनसे सीधा संवाद किया। निरीक्षण के दौरान उनके साथ जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
इमरजेंसी वार्ड का गहन मुआयना
नोडल अधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने मेडिकल कॉलेज की आपातकालीन सेवाओं का जायजा लेते हुए सबसे पहले चिकित्सकों की उपस्थिति और ड्यूटी रोस्टर का मिलान किया। उन्होंने इमरजेंसी में उपलब्ध जीवन रक्षक दवाओं के स्टॉक, चिकित्सा उपकरणों की कार्यक्षमता और वार्डों में साफ-सफाई के स्तर का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया कि इमरजेंसी सेवाओं में किसी भी प्रकार की तकनीकी या मानवीय कमी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यहाँ आने वाला हर पल मरीज के जीवन के लिए महत्वपूर्ण होता है।
मरीजों और तीमारदारों से सीधा संवाद
निरीक्षण की खास बात यह रही कि नोडल अधिकारी ने औपचारिक निरीक्षण से इतर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों से पूछा, “क्या डॉक्टर समय पर आते हैं? बाहर से दवा तो नहीं लिखनी पड़ती? स्टाफ का व्यवहार कैसा है?” राहत की बात यह रही कि संवाद के दौरान अधिकांश मरीजों और तीमारदारों ने मेडिकल कॉलेज की वर्तमान स्वास्थ्य सेवाओं और उपचार व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। मरीजों ने बताया कि उन्हें समय पर दवाएं मिल रही हैं और डॉक्टर नियमित रूप से राउंड पर आते हैं। नोडल अधिकारी ने इस सकारात्मक फीडबैक को बनाए रखने के निर्देश दिए।
डॉक्टरों को सख्त निर्देश: ‘मरीज ही सर्वोच्च प्राथमिकता’
नोडल अधिकारी ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और चिकित्सकों के साथ बैठक करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सीधे आमजन के जीवन से जुड़ी है। उन्होंने निर्देश दिए कि आपातकालीन कक्ष में आने वाले प्रत्येक मरीज को त्वरित और संवेदनशील उपचार मिलना चाहिए। इन्द्र विक्रम सिंह ने कहा, “चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ का व्यवहार मानवीय होना चाहिए। मरीज केवल दवा से नहीं, बल्कि डॉक्टर के व्यवहार से भी आधा ठीक हो जाता है।”
उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को आगाह किया कि इमरजेंसी सेवाओं में लापरवाही या दवाओं की कृत्रिम कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनैतिक व्यवहार की शिकायत मिलती है, तो संबंधित के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
नियमित समीक्षा और सुधार के निर्देश
नोडल अधिकारी ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अधीक्षक को निर्देशित किया कि वे स्वयं नियमित रूप से वार्डों का भ्रमण करें और जो भी कमियां सामने आएं, उन्हें तत्काल दूर करें। उन्होंने कहा कि अस्पताल में साफ-सफाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, अस्पताल अधीक्षक, वरिष्ठ चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और जिला प्रशासन के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।
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