​ऐतिहासिक नगरी कालपी के गौरव को लौटाने की तैयारी: पर्यटन और पुरातत्व विभाग की बड़ी पहल

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कालपी जालौन में ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण करती पर्यटन और पुरातत्व विभाग की टीम।

कालपी जालौन में ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण करती पर्यटन और पुरातत्व विभाग की टीम।

कालपी (जालौन): उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहरों को सहेजने के संकल्प के साथ शासन ने कालपी के कायाकल्प की योजना पर काम शुरू कर दिया है। बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार के रूप में जानी जाने वाली यह नगरी अपनी प्राचीनता और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रही है। अब, पर्यटन और पुरातत्व विभाग की संयुक्त टीम ने कालपी को एक प्रमुख धार्मिक-पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए जमीनी स्तर पर कवायद तेज कर दी है।

​प्रशासनिक टीम का स्थलीय निरीक्षण

​हाल ही में, उपजिलाधिकारी (SDM) मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय संयुक्त टीम ने नगर के विभिन्न ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का सघन निरीक्षण किया। इस टीम में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी डी.के. शर्मा, पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ, नायब तहसीलदार मुकेश कुमार और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारी शामिल थे।

​इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य उन स्थलों की पहचान करना था, जिनका संरक्षण और सौंदर्यीकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाना है। प्रशासन अब इन स्थलों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही शासन को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

​प्रमुख स्थलों का हुआ अवलोकन

​निरीक्षण के दौरान टीम ने कालपी के उन केंद्रों पर ध्यान केंद्रित किया जो अपनी वास्तुकला और इतिहास के लिए बेजोड़ हैं:

  1. गणेशगंज का प्राचीन गणेश मंदिर: मराठा कालीन यह मंदिर कालपी की आस्था का केंद्र है। निरीक्षण में पाया गया कि ‘आदि गणेश’ और ‘सिद्ध गणेश’ मंदिर का एक हिस्सा जर्जर हो चुका है। स्थानीय विधायक विनोद चतुर्वेदी ने इसके जीर्णोद्धार के लिए पहले ही शासन को प्रस्ताव भेजा था, जिस पर अब अमल होता दिख रहा है।
  2. यमुना तट के घाट: कालपी यमुना नदी के किनारे स्थित है। टीम ने बिहार घाट और पीला घाट का बारीकी से निरीक्षण किया। इन घाटों के सौंदर्यीकरण से न केवल तीर्थयात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
  3. ऐतिहासिक स्मारक: टीम ने चंदेल कालीन दुर्ग के अवशेषों, ब्रिटिश कालीन कब्रिस्तान और विश्व प्रसिद्ध ‘चौरासी गुंबद’ का भी दौरा किया। चौरासी गुंबद अपनी अद्वितीय वास्तुकला के लिए जाना जाता है और इसे संरक्षित करना पर्यटन की दृष्टि से अनिवार्य माना जा रहा है।

​पर्यटन केंद्र के रूप में विकास की संभावनाएं

​कालपी का महत्व बहुआयामी है। यह महर्षि व्यास की जन्मस्थली मानी जाती है और बीरबल की कर्मस्थली भी रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि इन स्मारकों का सही ढंग से संरक्षण और सौंदर्यीकरण हो जाए, तो कालपी को धार्मिक-ऐतिहासिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और बुंदेलखंड में पर्यटन की नई राहें खुलेंगी।

निष्कर्ष और भविष्य की योजना:

प्रशासन का लक्ष्य है कि कालपी में आने वाले पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं (जैसे पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सूचना केंद्र और मार्ग) का विस्तार किया जाए। क्षेत्रीय लेखपाल जितेंद्र कुमार और अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी इस पहल में सहयोग का आश्वासन दिया है। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है, तो कालपी अपनी खोई हुई आभा को पुनः प्राप्त कर सकेगी।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

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