​सपा सांसद के ‘विवादित बोल’ पर भड़का खंगार समाज, उरई में जोरदार प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग

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जालौन जिलाधिकारी को सांसद के खिलाफ ज्ञापन सौंपते खंगार क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधि

उरई (जालौन): जनपद जालौन के मुख्यालय उरई में उस समय माहौल गरमा गया जब बड़ी संख्या में खंगार क्षत्रिय समाज के लोग सड़कों पर उतर आए। मामला जालौन-गरौठा-भोगनीपुर क्षेत्र के समाजवादी पार्टी के सांसद नारायण दास अहिरवार द्वारा समाज के प्रति कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने का है। समाज का आरोप है कि सांसद ने एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान खंगार जाति के लिए ‘अछूत’ जैसे गरिमाहीन शब्द का प्रयोग किया है, जिससे पूरे देश के खंगार समाज की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।

कलेक्ट्रेट में गूंजे नारे, घेरा परिसर

​बुधवार को खंगार क्षत्रिय समाज के सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी उरई कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित हुए। यहाँ समाज के लोगों ने सांसद नारायण दास के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह की संकीर्ण और जातिवादी टिप्पणी की अपेक्षा नहीं की जा सकती। प्रदर्शन के दौरान ‘सांसद माफी मांगें’ और ‘जातिवादी राजनीति बंद करो’ जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

लोकसभा अध्यक्ष को संबोधित ज्ञापन सौंपा

​प्रदर्शन के बाद समाज के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से लोकसभा अध्यक्ष को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि सांसद के इस कृत्य पर संज्ञान लेते हुए लोकसभा सदन की मर्यादा के अनुरूप उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। समाज का तर्क है कि लोकतंत्र में किसी भी जाति या वर्ग को नीचा दिखाना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह संवैधानिक मूल्यों का भी उल्लंघन है।

“आंदोलन के लिए होंगे बाध्य” – सुभाष उदय पिंडारी

​खंगार क्षत्रिय समाज के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष सुभाष उदय पिंडारी ने मीडिया से रूबरू होते हुए कड़े शब्दों में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा:

​”सांसद नारायण दास द्वारा खंगार समाज को ‘अछूत’ कहना उनकी सामंती और पिछड़ी मानसिकता को दर्शाता है। खंगार समाज का एक गौरवशाली इतिहास रहा है, और इस तरह की टिप्पणी पूरे समाज का अपमान है। हम इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि लोकसभा सदन से सांसद के खिलाफ उचित कार्यवाही नहीं की जाती है, तो हमारा समाज चुप नहीं बैठेगा और हम बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।”

समाज में बढ़ता आक्रोश

​यह विवाद अब केवल जालौन तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया पर भी इस बयान की जमकर निंदा हो रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधि यदि चुनाव जीतने के बाद समाज को जातियों में बांटने और अपमानित करने का काम करेंगे, तो जनता का विश्वास लोकतंत्र से उठ जाएगा। खंगार समाज के बुजुर्गों और युवाओं दोनों में इस घटना को लेकर गहरा रोष व्याप्त है।

मुख्य मांगें:

  1. ​सांसद नारायण दास अपने विवादित बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
  2. ​लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सांसद की सदस्यता या आचरण पर संज्ञान लेकर कार्यवाही की जाए।
  3. ​भविष्य में किसी भी जाति के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी न करने की वैधानिक चेतावनी दी जाए।

​फिलहाल, प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार कर लिया है और उसे उच्चाधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि इस बढ़ते विवाद पर समाजवादी पार्टी या स्वयं सांसद का क्या रुख रहता है।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

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