कोंच: अधिशाषी अधिकारी की ठेकेदारों को कड़ी चेतावनी ‘गुणवत्ता में सुधार लाएं वरना होगी जेल’

कोंच (जालौन): नगर पालिका परिषद कोंच में विकास कार्यों के नाम पर हो रहे ‘खेल’ और लगातार गिरती गुणवत्ता को लेकर अब प्रशासन सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है। सोमवार को नगर पालिका परिषद के सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता अधिशाषी अधिकारी (EO) मोनिका उमराव ने की। इस बैठक में नगर पालिका के ठेकेदारों और अवर अभियंताओं (JE) की क्लास लगाई गई और उन्हें कड़े लहजे में चेतावनी दी गई।
गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं: ईओ मोनिका उमराव
बैठक के दौरान अधिशाषी अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नगर में चल रहे निर्माण कार्यों में मानक विहीन सामग्री का उपयोग और लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ठेकेदारों को निर्देशित किया कि सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से और तय मानकों के अनुसार ही किए जाएं। उन्होंने अवर अभियंताओं को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे अपनी देखरेख और पर्यवेक्षण (Supervision) में सुधार लाएं। ईओ ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी भी कार्य की गुणवत्ता मानकों के विपरीत पाई गई, तो संबंधित ठेकेदार और लापरवाह अवर अभियंता के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
लगातार खुल रही है निर्माण कार्यों की पोल
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से नगर पालिका कोंच द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लाखों-करोड़ों की लागत से बनने वाली संरचनाएं निर्माण के दौरान ही दम तोड़ती नजर आ रही हैं। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि नगर पालिका की छवि भी धूमिल हो रही है। स्थानीय नागरिकों और मीडिया द्वारा लगातार सरकारी धन के ‘बंदरबांट’ के आरोप लगाए जा रहे हैं।
सुर्खियों में रहे भ्रष्टाचार के बड़े मामले
नगर में घटिया निर्माण के कई मामले हाल ही में चर्चा का विषय बने रहे:
- धनु तालाब सुंदरीकरण: करीब 2.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से होने वाले इस प्रोजेक्ट में पिलरों का गिरना भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बनकर सामने आया।
- गांधीनगर नाला निर्माण: मरईं माता मंदिर से शनिदेव मंदिर तक बन रहा नाला निर्माण के दौरान ही धराशाई हो गया।
- कांशीराम कॉलोनी नाला: यहाँ भी नाले की दीवारें भरभरा कर गिर गईं, जिसने मानकों की अनदेखी की पोल खोल दी।
लगातार हो रही किरकिरी और मीडिया में खबरों के उछलने के बाद आखिरकार पालिका प्रशासन गहरी नींद से जागा है। हालांकि, नगर की जनता के बीच अब भी यह संशय बना हुआ है कि क्या यह महज एक औपचारिक डांट-फटकार है या धरातल पर कार्यों में कोई वास्तविक सुधार देखने को मिलेगा।
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