कोंच में बसंत पंचमी की धूम: श्रद्धा और उल्लास के साथ पूजी गईं ज्ञान की देवी, भक्तिमय अनुष्ठानों से सराबोर हुआ नगर

कोंच (जालौन): ऋतुराज बसंत के आगमन का प्रतीक ‘बसंत पंचमी’ का पर्व शुक्रवार को कोंच नगर और ग्रामीण अंचलों में अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। विद्या, बुद्धि और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना के लिए समर्पित इस दिन पूरा नगर पीले रंग की आभा और आध्यात्मिक वातावरण में डूबा नजर आया। शिक्षण संस्थानों से लेकर घरों तक में वैदिक रीति-रिवाज से पूजन संपन्न हुआ।
विद्यार्थियों ने किया तिलक वंदन: पीतांबर रंग में रंगा नगर
शुक्रवार की सुबह से ही श्रद्धालुओं, विशेषकर छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह देखा गया। परंपरा के अनुसार, बालक-बालिकाओं ने प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त होकर पीले वस्त्र धारण किए। पीला रंग बसंत का प्रतीक माना जाता है, जो समृद्धि और ज्ञान का परिचायक है। विद्यार्थियों ने माँ वीणावादिनी की प्रतिमा और चित्रों पर तिलक वंदन किया, पुष्प अर्पित किए और सरस्वती वंदना के माध्यम से सर्व ज्ञान और सद्बुद्धि की प्रार्थना की। विद्यालयों में हुए सामूहिक पूजन में शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बसंत पंचमी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया।
अमरचन्द महेश्वरी इंटर कॉलेज में गूंजी रामायण की चौपाइयां
नगर के प्रतिष्ठित अमरचन्द महेश्वरी इंटर कॉलेज में स्थित माँ सरस्वती मंदिर पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। कॉलेज में माँ सरस्वती मंदिर की स्थापना कराने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक ग्यासीलाल याज्ञिक के मार्गदर्शन में अखंड रामायण पाठ का आयोजन हुआ।
शुक्रवार दोपहर से प्रारंभ हुआ यह अखंड पाठ शनिवार की शाम तक चला। मंदिर के पुजारी जयनारायण मिश्र द्वारा उच्चारित मंत्रोच्चार के बीच हवन और पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। इस धार्मिक आयोजन में कॉलेज के समस्त स्टाफ सदस्यों सहित भारी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। समापन के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया।
सामाजिक सरोकार: निःशुल्क नासिका एवं कर्ण छेदन कार्यक्रम
बसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त को हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है। इसी क्रम में नगर में एक अनूठी सामाजिक और पारंपरिक पहल देखने को मिली। नगर के विभिन्न आभूषण प्रतिष्ठानों पर कन्याओं के लिए ‘नासिका एवं कर्ण छेदन’ (नाक और कान छिदवाना) के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन प्रतिष्ठानों पर न केवल निःशुल्क रूप से छेदन प्रक्रिया संपन्न की गई, बल्कि कन्याओं को उपहार स्वरूप सोने-चांदी की नाक और कान की बालियां भी भेंट की गईं। इस कदम की नगरवासियों ने सराहना की, क्योंकि यह परंपरा और सेवा का एक सुंदर संगम था।
धार्मिक केंद्रों पर उमड़ा जनसैलाब
अमरचन्द महेश्वरी इंटर कॉलेज के अतिरिक्त नगर के अन्य मंदिरों और मोहल्लों में भी माँ सरस्वती की झांकियां सजाई गईं। सायंकाल के समय आरती और भजनों के कार्यक्रमों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे और विभिन्न समितियों ने सुव्यवस्थित ढंग से आयोजनों को संपन्न कराया।
कुल मिलाकर, कोंच में इस वर्ष की बसंत पंचमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, शिक्षा और सामाजिक सौहार्द का एक बड़ा मंच साबित हुई।
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