उरई रेप केस में सनसनीखेज मोड़: कथित पीड़िता ने वीडियो जारी कर आरोपों को बताया झूठा, उम्र को लेकर भी फंसा पेंच

उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन के उरई कोतवाली क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोगों के होश उड़ा दिए हैं। जिस युवक पर पिता ने अपनी बेटी के साथ नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगाया था, उसी बेटी ने अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर पूरे मामले को ‘साजिश’ करार दिया है। इस हाई-प्रोफाइल ड्रामा में अब दोहरे आधार कार्ड और उम्र के विवाद ने कानूनी पेचीदगियों को और बढ़ा दिया है।
क्या था पूरा मामला? पिता की शिकायत पर FIR
घटना की शुरुआत 5 फरवरी को हुई, जब उरई के एक मोहल्ले में किराये पर रहने वाले व्यक्ति ने कोतवाली में लिखित तहरीर दी। पिता के मुताबिक, उनकी पुत्री B.A प्रथम वर्ष की छात्रा है। 4 फरवरी को जब वह और उनकी पत्नी गांव में वोटर लिस्ट संशोधन के लिए गए थे, तब उनकी बेटी लाइब्रेरी गई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि उमरारखेड़ा निवासी सचिन कुमार ने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर लाइब्रेरी के बाहर बुलाया और कोचिंग दिलाने के बहाने अपने दोस्त के घर ले गया। वहां युवती को नशीली कॉफी पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पिता का यह भी दावा था कि आरोपी के परिजनों ने उन पर समझौता करने का दबाव बनाया और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी सचिन को हिरासत में ले लिया था।
वायरल वीडियो ने पलटी पूरी कहानी
जैसे ही पुलिस ने आरोपी को पकड़ा, कथित पीड़िता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में युवती ने अपने ही पिता के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। युवती का कहना है कि:
”मेरे साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ है, जो भी हुआ वह मेरी मर्जी से हुआ। मेरे घरवाले मुझे ब्लैकमेल कर रहे हैं और मुझे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। थाने में दी गई तहरीर और मेरा मेडिकल परीक्षण भी मेरी मर्जी के खिलाफ दबाव में कराया गया है।”
युवती के इस बयान ने मामले को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। अब यह मामला ‘अपराध’ से ज्यादा ‘आपसी रजामंदी’ और ‘पारिवारिक विवाद’ की ओर मुड़ता दिख रहा है।
दो आधार कार्ड: 17 साल या 21 साल?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य युवती की उम्र को लेकर सामने आया है। जांच के दौरान पुलिस के हाथ युवती के दो अलग-अलग आधार कार्ड लगे हैं। एक कार्ड में उसकी उम्र 21 वर्ष (बालिग) दर्ज है, जबकि दूसरे में उसे 17 वर्ष (नाबालिग) दिखाया गया है।
युवती का दावा है कि वह बालिग है और उसके परिवार ने जानबूझकर दस्तावेजों में उसकी जन्मतिथि गलत दर्ज करवाई है ताकि आरोपी को कड़ी सजा दिलवाई जा सके। यदि युवती बालिग साबित होती है, तो यह केस पूरी तरह से कमजोर हो सकता है, लेकिन यदि वह नाबालिग पाई गई, तो उसकी मर्जी के बावजूद आरोपी पर पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
पुलिस की कार्रवाई और आगामी कदम
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने युवती को भी सुरक्षात्मक हिरासत में ले लिया है। अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) प्रदीप कुमार वर्मा ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि, “युवती और आरोपी के बयान आज न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए जाएंगे। उम्र से जुड़े दस्तावेजों और जन्म प्रमाण पत्र की गहनता से जांच की जा रही है। माननीय न्यायालय के समक्ष होने वाले बयानों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
फिलहाल, इस घटना ने उरई में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। क्या यह वास्तव में एक अपराध है या फिर प्रेम प्रसंग और पारिवारिक प्रतिष्ठा की लड़ाई? यह तो अब अदालत में दर्ज होने वाले बयानों के बाद ही साफ हो पाएगा।

Rahul (रिपोर्टर,जालौन) जालौन जनपद में स्थानीय समाचारों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करते हैं।






