नगरपालिका में बगावत की आग, ईओ मोनिका उमराव पर फूटा सभासदों का गुस्सा.. लेटर हेड पर लिख दी ‘निंदा’ की इबारत

नगर पालिका बोर्ड बैठक
कोंच(जालौन) : जालौन जिले की कोंच नगरपालिका परिषद की हालिया बोर्ड बैठक हंगामेदार रही। इस बैठक में विकास कार्यों की चर्चा से ज्यादा प्रशासनिक खींचतान और सभासदों का आक्रोश देखने को मिला। नगरपालिका अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में सभासदों ने एकमत होकर अधिशासी अधिकारी मोनिका उमराव की कार्यशैली पर सवाल उठाए और उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया।
ईओ की कार्यशैली और व्यवहार पर उठे सवाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैठक की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण नजर आया। लगभग सभी सभासद ईओ मोनिका उमराव के कामकाज के तरीके और उनके व्यवहार को लेकर लामबंद दिखे। सभासदों का आरोप है कि अधिशासी अधिकारी का आचरण न तो जनहित में है और न ही वह जनप्रतिनिधियों के साथ उचित तालमेल बिठा पा रही हैं।
लेटर हेड पर लिखी गई ‘निंदा’ की इबारत
सभासद अमित यादव के लेटर हेड पर लिखे गए इस निंदा प्रस्ताव में सीधे तौर पर कहा गया कि मोनिका उमराव का व्यवहार अनुकूल नहीं रहता है। इस प्रस्ताव पर करीब 20 सभासदों ने हस्ताक्षर किए, जिनमें प्रमुख रूप से:
- अमित यादव, महेंद्र सिंह कुशवाहा, रघुवीर कुशवाहा
- शमसुद्दीन मंसूरी, सीमा, वेदप्रकाश, नजराना
- मनोज इकड़या, कमरजहां, आजाद उद्दीन, नंदिनी
- लता राजे, विनोद, शादाब अंसारी, ममता देवी और मीरा
हंगामे के बीच पालिकाध्यक्ष ने इस निंदा प्रस्ताव को बोर्ड की आधिकारिक कार्यवाही का हिस्सा बनाने की अनुमति दे दी, जिसे सभासदों की एक बड़ी जीत माना जा रहा है।

विकास कार्यों के लिए 2 करोड़ की योजना स्वीकृत
हंगामे और निंदा प्रस्ताव के बावजूद, नगर के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
- मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना: बैठक में मुख्य रूप से इस योजना पर चर्चा हुई।
- बुनियादी सुविधाएं: निर्माण कार्य को लेकर सभासदों ने अपने-अपने वार्डों में नाली, खड़ंजा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के प्रस्ताव रखे।
- बजट: नगरपालिका सीमा के अंतर्गत लगभग 2 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों की योजना बनाई गई है, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकृत कर लिया गया।
आगे की राह और प्रशासनिक प्रभाव
बैठक के दौरान खुद अधिशासी अधिकारी मोनिका उमराव, आरआई सुनील कुमार और सभासद रविकांत कुशवाहा सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। हालांकि, निंदा प्रस्ताव पारित होने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पालिका प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच के संबंध आगे कैसा मोड़ लेते हैं।
आमतौर पर किसी अधिकारी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव का पास होना प्रशासनिक स्तर पर उसकी रिपोर्ट को प्रभावित करता है। सभासदों का स्पष्ट कहना है कि यदि अधिकारी का व्यवहार नहीं सुधरा, तो वे विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं को लेकर उच्चाधिकारियों और शासन तक अपनी बात पहुंचाएंगे।
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