​डीएम राजेश कुमार पांडेय का कोंच में कड़ा रुख: नगर पालिका और ब्लॉक के वार्षिक निरीक्षण में मिलीं खामियां, अधिकारियों को फटकार और ठेकेदारों पर पेनाल्टी के निर्देश

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जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय कोंच नगर पालिका और ब्लॉक कार्यालय का वार्षिक निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं

रिपोर्ट-साजिद जालौन | UP SAMVAD

कोंच (जालौन): जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने गुरुवार को कोंच तहसील क्षेत्र का सघन दौरा करते हुए नगर पालिका परिषद और ब्लॉक कार्यालय का वार्षिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक सुस्ती और निर्माण कार्यों में बरती जा रही लापरवाही को देखकर जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया। उन्होंने न केवल संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई, बल्कि जनता के धन का दुरुपयोग रोकने के लिए कड़े दंडात्मक निर्देश भी जारी किए।

हाउस टैक्स की चोरी पर डीएम की टेढ़ी नजर

​नगर पालिका परिषद के निरीक्षण के दौरान राजस्व वसूली की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने पाया कि नगर में हाउस टैक्स की वसूली उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है। समीक्षा में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि लगभग 500 से 700 मकान अब तक कर निर्धारण (Tax Assessment) के दायरे से बाहर हैं।

​इस गंभीर लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने अधिशासी अधिकारी (EO) मोनिका उमराव को तत्काल प्रभाव से सर्वे कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “एक भी पात्र मकान टैक्स के दायरे से बाहर नहीं रहना चाहिए।” साथ ही, उन्होंने उन मोहल्लों में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा जहाँ से राजस्व प्राप्त हो रहा है।

लापरवाह ठेकेदारों पर गिरेगी गाज: लगेगा 10% लेट डैमेज क्लॉज

​विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने पाया कि कई ठेकेदारों ने टेंडर मिलने के बावजूद निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी की है। डीएम पांडेय ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि जिन कार्यों में समयसीमा का उल्लंघन हुआ है, उन पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार 10% लेट डैमेज (LD) क्लॉज लागू किया जाए।

​उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि “देरी करने वाले ठेकेदारों के बिलों से कटौती की जाए और यदि फिर भी सुधार नहीं होता, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करें।” डीएम ने भविष्य के सभी अनुबंधों में ‘डिले क्लॉज’ को अनिवार्य रूप से शामिल करने का आदेश दिया ताकि देरी होने पर स्वतः कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

गुणवत्ता से समझौता नहीं, वेतन से होगी कटौती

​निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर जोर देते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि सड़कों या अन्य निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग पाया गया, तो केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि संबंधित अभियंता (Engineer) भी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा कि मानकों में कमी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से कटौती कर सुधार कार्य कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नगर विकास विभाग के नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि 10 लाख रुपये तक की सड़कों का भौतिक सत्यापन कराने के बाद ही कार्य प्रारंभ किया जाए।

जल निकासी और स्वच्छता के लिए कड़े निर्देश

​निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ब्लॉक कार्यालय और नगर के जलभराव वाले इलाकों का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि जल निकासी की स्थायी व्यवस्था के लिए पक्की सड़कों के दोनों ओर नालियों का निर्माण अनिवार्य रूप से कराया जाए। ब्लॉक परिसर में स्वच्छता बनाए रखने, सुलभ शौचालय की व्यवस्था और ‘जनता दर्शन’ को अधिक प्रभावी बनाने पर भी बल दिया गया। डीएम ने निर्देश दिया कि नगर पालिका द्वारा खरीदी गई मशीनों और उपकरणों का पूर्ण उपयोग शहर को स्वच्छ रखने में किया जाए।

प्रशासनिक अमले की मौजूदगी

​इस महत्वपूर्ण वार्षिक निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी (SDM) ज्योति सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता, सहायक अभियंता नंदकिशोर सहित अन्य विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी की इस औचक कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा रहा।

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