बुंदेलखंड में ज्ञान की नई मशाल: जालौन के चमारी गांव में ‘माता प्रसाद पुस्तकालय’ का भव्य शुभारंभ

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन/कालपी: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक छोटे से गांव चमारी ने रविवार को उस समय इतिहास रच दिया, जब देश की राजनीति, साहित्य, कला और शिक्षा जगत की दिग्गज हस्तियों ने एक सुर में ग्रामीण भारत के बौद्धिक उत्थान का आह्वान किया। अवसर था—‘माता प्रसाद पुस्तकालय’ का भव्य उद्घाटन। शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठाए गए इस कदम को बुंदेलखंड के लिए एक वैचारिक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है।
महाकुंभ जैसा नजारा: दिग्गज हस्तियों का जमावड़ा

कालपी तहसील के ग्राम चमारी में आयोजित इस गरिमामय समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास, प्रसिद्ध अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे, स्टैंड-अप कॉमेडियन जाकिर खान और युवाओं के चहेते शिक्षाविद डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने शिरकत की। एक ही मंच पर इतने विविध क्षेत्रों के दिग्गजों की उपस्थिति ने इस पुस्तकालय की महत्ता को रेखांकित कर दिया।
ज्ञान की चिंगारी बनेगा यह पुस्तकालय: कैलाश सत्यार्थी
समारोह को संबोधित करते हुए नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने भावुक स्वर में कहा, “यह पुस्तकालय केवल ईंट-पत्थरों से बना एक भवन नहीं है, बल्कि यह वह ज्ञान की चिंगारी है जिसकी तपिश पूरे बुंदेलखंड से निकलकर विश्व पटल तक जाएगी।” उन्होंने बाल श्रम की कुप्रथा पर प्रहार करते हुए कहा कि जब तक समाज का एक भी बच्चा मजदूरी करने को मजबूर है, तब तक देश का विकास अधूरा है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि बुंदेलखंड के हर हिस्से में ऐसे 100 पुस्तकालय खुल जाएं, तो यह एक बड़ा सामाजिक आंदोलन बन जाएगा।
ग्रामीण युवाओं के सपनों को मिलेगी उड़ान: उपमुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अक्सर बड़े संसाधन शहरों तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन चमारी गांव में इस पुस्तकालय की स्थापना ने इस धारणा को तोड़ दिया है। उन्होंने कहा, “अब गांव का युवा भी यहीं बैठकर आईएएस और आईपीएस जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर सकेगा। सरकार इस तरह के जमीनी प्रयासों का हमेशा समर्थन करेगी।”
सांस्कृतिक जड़ों की ओर वापसी: कुमार विश्वास व अन्य वक्ता
डॉ. कुमार विश्वास ने अपने विशिष्ट अंदाज में कहा कि डिजिटल युग में भी किताबों का महत्व कम नहीं हुआ है। किताबें चेतना का विस्तार करती हैं और युवा आज अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है। वहीं, अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में 50 लड़कियों को गोद लेने (अपनाने) की घोषणा कर महिला सशक्तिकरण का एक नया उदाहरण पेश किया।
राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि वह इस पुस्तकालय के मॉडल का अध्ययन करने आए हैं ताकि इसे अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी दोहराया जा सके।
सकारात्मक बदलाव और युवाओं का उत्साह
कार्यक्रम का सफल आयोजन वरिष्ठ पत्रकार सौरभ द्विवेदी और इन्फो पार्क के डायरेक्टर अभय द्विवेदी द्वारा किया गया। जाकिर खान ने चुटकी लेते हुए कहा कि आमतौर पर उन्हें मनोरंजन के लिए बुलाया जाता है, लेकिन पुस्तकालय के लिए निमंत्रण मिलना उनके लिए सबसे गर्व का क्षण है।
समारोह में आशीष पटेल, प्रशांत सिंह, प्रतीक सिंह और अवनीश सागा सहित कई जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में ग्रामीण व युवा मौजूद रहे। माता प्रसाद पुस्तकालय अब बुंदेलखंड के युवाओं के लिए न केवल अध्ययन का केंद्र बनेगा, बल्कि यह उनके सपनों को हकीकत में बदलने की प्रयोगशाला भी सिद्ध होगा।







