नौ लाख रुपये के चेक अनादरण मामले में अदालत ने शकील को दोषी ठहराया, 13.50 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया।NEWS:
जालौन में करीब छह वर्ष तक चली सुनवाई के बाद चेक बाउंस के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, उरई की अदालत ने शकील पुत्र फखरूद्दीन को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उसे एक वर्ष के कारावास और 13.50 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। मामला वर्ष 2020 में नौ लाख रुपये के चेक के अनादरण से जुड़ा है।
न्यायालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, उरई के गोपालगंज निवासी अरविन्द कुमार गुप्ता और चन्द्रनगर निवासी शकील के बीच व्यापारिक संबंध थे। परिवाद के अनुसार, शकील ने वर्ष 2017 और 2018 में व्यापारिक जरूरतों के लिए अरविन्द से कुल नौ लाख रुपये लिए थे। यह रकम अरविन्द के बैंक खाते से शकील की फर्म नूर मोबाइल्स के बैंक खाते में स्थानांतरित की गई थी।
परिवादी के अनुसार, भुगतान की मांग करने पर शकील ने अपनी फर्म के बैंक खाते की 10 अक्टूबर 2020 की नौ लाख रुपये की चेक दी। चेक 23 अक्टूबर 2020 को बैंक में प्रस्तुत की गई, लेकिन 26 अक्टूबर को खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण वापस हो गई।
इसके बाद अरविन्द कुमार गुप्ता ने अधिवक्ता के माध्यम से 10 नवंबर 2020 को रजिस्टर्ड नोटिस भेजकर चेक की धनराशि का भुगतान मांगा। भुगतान नहीं होने पर उन्होंने धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में परिवाद दाखिल किया।
मामले में दोनों पक्षों की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। करीब छह वर्षों की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद शकील को दोषी मानते हुए एक वर्ष के कारावास और 13.50 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। परिवादी की ओर से अधिवक्ता हेमंत द्विवेदी ने पैरवी की।






