​इंस्पेक्टर अरुण राय मौत मामला: 38 दिनों से जेल में बंद महिला सिपाही मीनाक्षी की तीसरी पेशी, चार्जशीट पर टिकी जमानत की उम्मीद

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अरुण राय फाइल फोटो

उरई (जालौन): जनपद के कुठौंद थाने में तैनात रहे इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर रखी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की मुख्य आरोपी और जिला कारागार उरई में निरुद्ध महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा की मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तीसरी बार पेशी हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अभिषेक खरे की अदालत ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद मामले की अगली तारीख 23 जनवरी मुकर्रर की है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई शिनाख्त

​सुरक्षा और प्रक्रियात्मक कारणों से मीनाक्षी शर्मा को जेल से अदालत नहीं लाया गया। लगभग पांच मिनट तक चली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान अदालत ने आरोपी महिला सिपाही की पहचान की पुष्टि की। न्यायालय ने प्रक्रिया के तहत उनका नाम और विवरण पूछा। यह मीनाक्षी की तीसरी पेशी थी; इससे पहले वह 19 दिसंबर और 1 जनवरी को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हो चुकी हैं। वर्तमान में वह पिछले 38 दिनों से न्यायिक हिरासत में जेल की सलाखों के पीछे हैं।

जमानत के रास्ते में ‘चार्जशीट’ की बाधा

​कानूनी गलियारों में इस बात की सबसे अधिक चर्चा है कि आखिर मीनाक्षी शर्मा की जमानत याचिका अब तक दाखिल क्यों नहीं हुई। जानकारों का कहना है कि पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने अब तक अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) पेश नहीं किया है।

​अधिवक्ताओं के अनुसार, जब तक विवेचना पूरी होकर चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती, तब तक नियमित जमानत (Regular Bail) की अर्जी पर प्रभावी सुनवाई होना कठिन होता है। फिलहाल पुलिस साक्ष्यों को जुटाने और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार करने का हवाला दे रही है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गति धीमी बनी हुई है।

5 दिसंबर की वो काली रात: क्या हुआ था कुठौंद थाने में?

​इस पूरे मामले की जड़ें 5 दिसंबर 2025 की उस रात में छिपी हैं, जब कुठौंद थाने के सरकारी आवास में गोलियों की गूंज सुनाई दी थी। इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय अपने आवास पर मृत पाए गए थे; उन्हें उनकी ही सर्विस रिवॉल्वर से गोली लगी थी।

​घटना के समय महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा उनके कमरे में ही मौजूद थीं। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि गोली चलने के तुरंत बाद मीनाक्षी बदहवास हालत में चिल्लाते हुए कमरे से बाहर निकलीं। इंस्पेक्टर की पत्नी माया राय ने सीधे तौर पर मीनाक्षी पर हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद 7 दिसंबर को पुलिस ने मीनाक्षी को गिरफ्तार कर लिया था।

SIT की जांच और फॉरेंसिक साक्ष्य

​मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी कमान विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपी गई है। कुठौंद थाना प्रभारी और मामले के विवेचक अजय पाठक के नेतृत्व में जांच टीम कई पहलुओं पर काम कर रही है:

  1. सीसीटीवी फुटेज: थाने के भीतर और बाहर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग जांच का सबसे अहम हिस्सा है, जो घटनाक्रम के समय की पुष्टि करती है।
  2. गन पाउडर रिपोर्ट: फॉरेंसिक लैब से गन पाउडर और बैलिस्टिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि गोली किसने और किस दूरी से चलाई थी।
  3. फॉरेंसिक साक्ष्य: घटनास्थल से उठाए गए फिंगरप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है।

​विवेचना टीम का कहना है कि जैसे ही गन पाउडर और फॉरेंसिक रिपोर्ट प्राप्त होगी, जांच को अंतिम रूप देकर चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।

भावुक पिता और कानूनी लड़ाई

​एक ओर जहाँ पुलिस अपनी जांच को पुख्ता करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर मीनाक्षी के पिता विपिन कुमार शर्मा अपनी बेटी को बेगुनाह साबित करने और जेल से बाहर लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। वे लगातार उरई के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के संपर्क में हैं। पिता का कहना है कि उनकी बेटी को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। हालांकि, कानूनी पेचदगियों और चार्जशीट के अभाव में उनकी उम्मीदें अब 23 जनवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

निष्कर्ष

​इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय की मौत का मामला उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। क्या यह हत्या थी, आत्महत्या या फिर कोई हादसा? इन सवालों के जवाब पुलिस की फाइनल चार्जशीट में ही छिपे हैं। तब तक महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा को जेल में ही रातें काटनी होंगी।

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