कोंच: वन विभाग की नर्सरी में ‘पसीने’ का अपमान, 6 माह से मजदूरी न मिलने पर मजदूरों ने खोला मोर्चा

कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर जहाँ ‘सबका साथ-सबका विकास’ और श्रम अधिकारों की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद जालौन के वन विभाग में मजदूरों का आर्थिक शोषण थमने का नाम नहीं ले रहा है। तहसील क्षेत्र के ग्राम घुसिया स्थित वन विभाग की नर्सरी में दिन-रात कड़ी मेहनत करने वाले मजदूरों को पिछले छह महीनों से मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। भुखमरी की कगार पर पहुंचे आक्रोशित मजदूरों ने बुधवार को वन विभाग के कार्यालय का घेराव किया और विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपना दुखड़ा सुनाते हुए बकाया मानदेय की मांग की।
6300 रुपये के मानदेय के लिए भी तरस रहे मजदूर
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने बताया कि वे सभी अप्रैल माह से लगातार नर्सरी में जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। इन मजदूरों का मुख्य कार्य नर्सरी में पौधों की निदाई, गुड़ाई, सिंचाई और पौधारोपण करना है। विडंबना यह है कि भीषण गर्मी और अब कड़ाके की ठंड में काम करने के बावजूद इन्हें बीते छह महीनों से एक रुपया भी नसीब नहीं हुआ है।
मजदूरों ने जानकारी दी कि वे वर्ष 2006 से लगातार इस नर्सरी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें प्रतिमाह मात्र 6300 रुपये का अल्प मानदेय मिलता है। इतनी कम राशि में परिवार चलाना पहले ही चुनौतीपूर्ण था, ऊपर से पिछले छह माह से भुगतान रुक जाने के कारण उनके घरों में चूल्हा जलना भी दूभर हो गया है। बच्चों की फीस, दवाइयां और रोजमर्रा के राशन के लिए उन्हें कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
डीएफओ (DFO) कार्यालय में अटकी है फाइल
मजदूरों के अनुसार, उनकी मजदूरी के भुगतान से संबंधित सभी बिल और कागजी कार्रवाई स्थानीय स्तर पर पूरी की जा चुकी है। इन बिलों को अंतिम स्वीकृति के लिए प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) कार्यालय, उरई भेजा गया था। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उरई कार्यालय से इन बिलों को पास नहीं किया गया है। मजदूरों का आरोप है कि उच्च अधिकारियों की उदासीनता और फाइलों के अटके होने के कारण उनके पसीने की कमाई पर ‘ताला’ लगा हुआ है।
नर्सरी प्रभारी का पक्ष: “हमारा काम बिल भेजना है”
इस पूरे प्रकरण पर जब घुसिया वन विभाग नर्सरी के प्रभारी शिवाजी से बात की गई, तो उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर की। उन्होंने स्वीकार किया कि मजदूरों का भुगतान लंबित है। उन्होंने कहा:
”मजदूरों को उनका हक दिलाने के लिए विभाग पूरी तरह गंभीर है। हमारी ओर से सभी आवश्यक मस्टरोल और बिल तैयार कर उच्चाधिकारियों (DFO कार्यालय) को प्रेषित कर दिए गए हैं। जैसे ही वहां से बजट रिलीज होगा और बिल पास होंगे, मजदूरों के बैंक खातों में पैसा भेज दिया जाएगा।”
चेतावनी: भुगतान नहीं तो काम बंद
कार्यालय पहुंचे मजदूरों ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि जल्द ही उनके छह माह के बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो वे नर्सरी का काम पूरी तरह ठप कर देंगे। उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप कर मानवीय आधार पर जल्द कार्रवाई की अपील की है।
इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्रीय मजदूर और उनके प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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