कोंच: वन विभाग की नर्सरी में 8 महीने से पसीना बहा रहे मजदूरों को नहीं मिली मजदूरी, दाने-दाने को मोहताज हुए परिवार

कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की कोंच तहसील में सरकारी सिस्टम की एक बेहद संवेदनहीन तस्वीर सामने आई है। ग्राम घुसिया और खैराई में स्थित वन विभाग की नर्सरी में काम करने वाले दर्जनों मजदूर पिछले आठ महीनों से अपनी खून-पसीने की कमाई के लिए भटक रहे हैं। शनिवार को अपनी पीड़ा लेकर ये बेबस मजदूर ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ में पहुंचे और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) ज्योति सिंह के सामने गुहार लगाई।
मजदूरों का दर्द: “काम लिया, पर दाम नहीं दिया”
शनिवार की दोपहर करीब 2:30 बजे, जब कड़कड़ाती धूप और अपनी समस्याओं के बोझ तले दबे मजदूर तहसील परिसर पहुंचे, तो उनकी आंखों में बेबसी साफ झलक रही थी। एसडीएम को सौंपे गए शिकायती पत्र में मजदूरों ने आरोप लगाया कि वे ग्राम घुसिया और खैराई स्थित वन विभाग की पौधशाला (नर्सरी) में पिछले आठ महीनों से लगातार काम कर रहे हैं।
मजदूरों ने बताया कि उन्होंने नर्सरी में निदाई, गुड़ाई और पौधारोपण जैसे कठिन शारीरिक श्रम वाले कार्य किए हैं। लेकिन विडंबना यह है कि नर्सरी इंचार्ज द्वारा बार-बार आश्वासन देने के बावजूद उन्हें आज तक एक भी रुपया मजदूरी के रूप में नहीं दिया गया है।
घरों में छाई मुफलिसी, बच्चों की पढ़ाई और रोटी का संकट
मजदूरों ने एसडीएम को अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि मजदूरी न मिलने के कारण उनके घरों की स्थिति दयनीय हो गई है। आठ महीने का लंबा समय बीत जाने के कारण उनके सामने अब दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। दैनिक जरूरतों, बच्चों की स्कूल फीस और दवाइयों के लिए उन्हें दूसरों से कर्ज लेना पड़ रहा है। मजदूरों का कहना है कि “जब सरकारी विभाग ही हमारा हक मार लेगा, तो हम गरीब कहाँ जाएंगे?”
नर्सरी इंचार्ज पर मनमानी के आरोप
मजदूरों ने सीधे तौर पर नर्सरी इंचार्ज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब भी वे अपनी मजदूरी मांगते हैं, तो उन्हें टाल दिया जाता है। विभाग के बजट या तकनीकी कारणों का बहाना बनाकर उन्हें पिछले आठ महीनों से अंधेरे में रखा गया है। मजदूरों ने मांग की है कि नर्सरी इंचार्ज को कड़े निर्देश दिए जाएं ताकि उनकी बकाया राशि का भुगतान तुरंत किया जा सके।
प्रशासनिक रुख: एसडीएम ने दिए सख्त निर्देश
मामले की गंभीरता और मजदूरों की दयनीय हालत को देखते हुए एसडीएम ज्योति सिंह ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद वन विभाग के प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्देशित किया कि मजदूरों के भुगतान में हो रही देरी का कारण स्पष्ट किया जाए। एसडीएम ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द कागजी कार्यवाही पूरी कर मजदूरों के बैंक खातों में उनकी बकाया मजदूरी का पैसा ट्रांसफर करना सुनिश्चित करें।
निष्कर्ष और सवाल
यह घटना दर्शाती है कि एक तरफ जहाँ सरकार ‘श्रमेव जयते’ का नारा देती है, वहीं जमीन पर सरकारी विभाग ही मजदूरों का शोषण कर रहे हैं। आठ महीने तक मजदूरी न मिलना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है। अब देखना यह होगा कि एसडीएम के आदेश के बाद इन गरीब परिवारों को उनका हक कितनी जल्दी मिलता है।






