​कोंच: संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘सप्त शक्ति संगम’ का भव्य आयोजन; राष्ट्र निर्माण में मातृ शक्ति की भूमिका पर मंथन

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कोंच के सरस्वती शिशु मंदिर हाटा में आयोजित सप्त शक्ति संगम कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन करती मुख्य अतिथि निधि सिंघल, राजकुमारी स्वर्णकार एवं अन्य विशिष्ट महिला पदाधिकारी

कोंच (जालौन): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर शनिवार को कोंच नगर के सरस्वती शिशु मंदिर, हाटा में ‘सप्त शक्ति संगम’ कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। इस विशेष समागम में नारी शक्ति के विविध आयामों, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना पर गहन चिंतन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं ने समाज और राष्ट्र के उत्थान में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

भक्तिमय वातावरण में हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

​कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि निधि सिंघल और अध्यक्षता कर रहीं राजकुमारी स्वर्णकार द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्चन के साथ किया गया। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। विशिष्ट अतिथियों के रूप में आभा तिवारी और डॉ. विनोद कुमारी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई, जिनका विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक स्वागत किया गया।

मातृ शक्ति: राष्ट्र और समाज की आधारशिला

​कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य विविध श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि ‘सप्त शक्ति संगम’ का मूल ध्येय मातृ शक्ति को उनकी अंतर्निहित शक्तियों के प्रति जाग्रत करना है। उन्होंने विस्तार से बताया कि एक सशक्त, समृद्ध और सुसंस्कृत समाज का निर्माण तभी संभव है जब महिलाएं जागरूक और आत्मनिर्भर हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी का भाव और सामाजिक समरसता जैसे विषयों में महिलाओं की भूमिका निर्णायक होती है।

सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता का आह्वान

​मुख्य अतिथि निधि सिंघल ने उपस्थित मातृ शक्ति को संबोधित करते हुए एक ओजस्वी भाषण दिया। उन्होंने कहा, “नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि राष्ट्र की आधारशिला है। वर्तमान समय में महिलाओं को अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझना होगा और परिवार के साथ-साथ समाज के सर्वांगीण विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभानी होगी।” उन्होंने भारतीय इतिहास के उन गौरवशाली प्रसंगों का भी उल्लेख किया जहाँ महिलाओं ने अपनी वीरता और विद्वत्ता से राष्ट्र को नई दिशा प्रदान की थी।

सात शक्तियों पर केंद्रित रही चर्चा

​कार्यक्रम के दौरान ‘सप्त शक्ति’ के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण, भारतीय संस्कार, सामाजिक एकता, पर्यावरण चेतना, स्वदेशी जीवन शैली, कुटुंब प्रबोधन और राष्ट्रीय चेतना जैसे सात प्रमुख स्तंभों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में यह संकल्प लेना अनिवार्य है कि हम अपने घरों को संस्कारों का केंद्र बनाएं और समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध एकजुट हों।

गणमान्य नागरिकों की रही गरिमामयी उपस्थिति

​इस वैचारिक संगम में प्रेमलता, सोनिया, मेघा, हेमलता जैसी महिला प्रतिनिधियों के साथ-साथ राजकुमार, राघवेंद्र एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित मातृ शक्ति ने सामूहिक रूप से राष्ट्र की सेवा और समाज के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का संकल्प लिया। सरस्वती शिशु मंदिर हाटा के इस सफल आयोजन की सराहना पूरे नगर में हो रही है, जिसे संघ के शताब्दी वर्ष के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

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