कोंच: एनएसएस शिविरों में गूंजा जल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश; स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर टटोली गांव की नब्ज

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जालौन के कोंच में एनएसएस शिविर के दौरान ग्रामीण सर्वेक्षण करते स्वयंसेवक और जल संरक्षण पर आयोजित संगोष्ठी की सामूहिक तस्वीर

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कोंच (जालौन): जनपद के कोंच क्षेत्र में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के विशेष शिविरों के माध्यम से छात्र-शक्ति राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सुधार की अलख जगा रही है। विभिन्न महाविद्यालयों द्वारा आयोजित इन शिविरों में न केवल पर्यावरण और जल संरक्षण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है, बल्कि वैज्ञानिक पद्धति से गांवों का सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कर विकास की नई इबारत लिखने का प्रयास भी शुरू हुआ है।

ग्राम लौना में घर-घर पहुंचे स्वयंसेवक: शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट

​सूरज ज्ञान महाविद्यालय के विशेष शिविर के तीसरे दिन शुक्रवार को ग्राम लौना में व्यापक गतिविधियों का आयोजन किया गया। प्रभारी प्राचार्य डॉ. आशुतोष मिश्रा एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनील मुदगिल के कुशल नेतृत्व में गठित शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, वीर सावरकर, रानी लक्ष्मीबाई और रानी अहिल्या बाई टोलियों के स्वयंसेवकों ने पूरे उत्साह के साथ गांव का भ्रमण किया।

​इन टोलियों ने गांव के प्रत्येक घर में जाकर विस्तृत सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक सर्वेक्षण किया। इस दौरान परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा का स्तर, बच्चों के टीकाकरण की स्थिति, आय के स्रोत और केंद्र व राज्य सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं (जैसे उज्ज्वला, आयुष्मान, और आवास योजना) से लाभान्वित होने की स्थिति का डेटा एकत्रित किया गया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मुदगिल ने बताया कि यह डेटा उच्चाधिकारियों के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा, ताकि ग्रामीणों की मूलभूत समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। इस दौरान अनिल यादव, मुकेश कुमार और पवन यादव सहित अन्य स्टाफ व्यवस्थाओं में जुटे रहे।

जल और वन संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य का आधार

​अशोक शुक्ला महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के शिविर में छात्राओं को पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने का संकल्प दिलाया गया। मुख्य अतिथि कोषाध्यक्ष शेखर शुक्ला ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि पानी की एक-एक बूंद कीमती है। उन्होंने “आधी बाल्टी पानी, जीवन की कहानी” जैसे सूत्रों के माध्यम से जल की बर्बादी रोकने का आह्वान किया।

​महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार द्विवेदी ने प्रदूषण के खतरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। इनसे बचने का एकमात्र तरीका व्यापक पौधारोपण और संसाधनों का सीमित उपयोग है। कार्यक्रम में डॉ. नौशाद अहमद, अंजना द्विवेदी और अखिलेश विक्रम सहित कई प्राध्यापक उपस्थित रहे।

जनभागीदारी से ही थमेगा जल संकट: ग्राम जुझारपुरा

​उधर, सेठ बद्री प्रसाद स्मृति महाविद्यालय द्वारा ग्राम जुझारपुरा में आयोजित शिविर में ‘जल संरक्षण’ विषय पर विचार गोष्ठी संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हरिशंकर निरंजन ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि यदि आज हम सचेत नहीं हुए, तो अगली पीढ़ी को भीषण जल संकट विरासत में मिलेगा। उन्होंने जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया।

​कोऑर्डिनेटर कन्हैया नीखर ने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण केवल सरकारी फाइलों या योजनाओं से संभव नहीं है, जब तक कि इसमें प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी न समझे। इस अवसर पर पूर्व प्रधान प्रतिनिधि अनुज प्रताप सिंह और कार्यवाहक प्राचार्य ब्रजेंद्र सिंह निरंजन ने भी अपने विचार साझा किए।

नुक्कड़ नाटक के जरिए स्वच्छता का संदेश

​मथुरा प्रसाद महाविद्यालय के स्वयंसेवकों ने स्वच्छता को संस्कार बनाने का बीड़ा उठाया है। स्वयंसेवकों ने मार्कंडेयश्वर तिराहे पर एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकना न केवल दंडनीय है, बल्कि यह बीमारियों को भी आमंत्रण देता है। कार्यक्रम अधिकारी लवकेश और डॉ. मधुलता द्विवेदी के मार्गदर्शन में छात्रों ने लोगों को ‘स्वच्छ भारत अभियान’ में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

​इन शिविरों ने यह सिद्ध कर दिया है कि युवा शक्ति यदि सही दिशा में संकल्पित हो, तो ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती हैं।

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