रेलवे संविदा भर्ती में बड़ा खेल: सीबीआई का उरई-चित्रकूट में छापा, तीन रेलकर्मी रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

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सीबीआई अधिकारियों द्वारा उरई और चित्रकूट में रेलवे कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के बाद की कार्रवाई का सांकेतिक दृश्य

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई/जालौन: भारतीय रेलवे के तकनीकी विभाग में नियुक्तियों के नाम पर चल रहे भ्रष्टाचार के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। लखनऊ से आई सीबीआई की विशेष टीम ने जालौन जिले के उरई और पड़ोसी जिले चित्रकूट में एक साथ छापेमारी कर रेलवे के तीन कर्मचारियों को रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद से उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल के अंतर्गत आने वाले विभागों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आधी रात का ऑपरेशन

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई संविदा कर्मचारियों की भर्ती में चल रही कथित अवैध उगाही से जुड़ी है। सीबीआई को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि उरई स्थित टीआरडी (Traction Rolling Stock) विभाग के कुछ वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारी नई भर्तियों के नाम पर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूल रहे हैं।

​सीबीआई इंस्पेक्टर देवेश के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाया और योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी। उरई में हुई छापेमारी के दौरान एसएससी (SSC) टीआरडी बी.एस. पाल को कथित तौर पर रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोच लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसाs र, सीबीआई की टीम सादे कपड़ों में थी, जिससे स्थानीय विभाग के अन्य कर्मचारियों को भनक तक नहीं लग सकी।

चित्रकूट तक फैले भ्रष्टाचार के तार

​उरई में हुई गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए चित्रकूट में भी छापेमारी की। यहाँ से टीम ने डीईई (DEE) टीआरडी शांतनु यादव और टेक्नीशियन प्रकाश कुशवाहा को हिरासत में लिया। अधिकारियों के मुताबिक, ये तीनों आपस में तालमेल बिठाकर संविदा भर्ती की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे थे और पात्र उम्मीदवारों से नौकरी के बदले अवैध धन की मांग कर रहे थे।

गोपनीय जांच और साक्ष्यों का संकलन

​जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि कुछ पीड़ित अभ्यर्थियों ने लखनऊ स्थित सीबीआई मुख्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि योग्यता होने के बावजूद उनसे पद के बदले लाखों रुपयों की मांग की जा रही है। सीबीआई ने पहले इन शिकायतों की गोपनीय तरीके से पुष्टि की और डिजिटल साक्ष्य जुटाए। जब भ्रष्टाचार की पुष्टि हो गई, तब छापेमारी की अनुमति दी गई।

विभागीय महकमे में मची खलबली

​गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को लखनऊ ले जाया गया है, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। टीम ने उनके कार्यालयों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और संविदा भर्ती से जुड़ी फाइलें भी अपने कब्जे में ली हैं। सीबीआई अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह केवल एक छोटी कड़ी हो सकती है और इस भ्रष्टाचार के पीछे विभाग के कुछ और बड़े अधिकारियों या बाहरी बिचौलियों का हाथ होने की प्रबल संभावना है।

अधिकारी का बयान: “भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों के पास से मिले साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। यदि इस सिंडिकेट में अन्य लोगों की संलिप्तता पाई गई, तो उनके विरुद्ध भी कठोर कानूनी कदम उठाए जाएंगे।”

​यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी पदों का दुरुपयोग कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। वर्तमान में, उरई और चित्रकूट के टीआरडी अनुभागों में सन्नाटा पसरा हुआ है और अन्य कर्मचारी भी जांच के दायरे में आने के डर से डरे हुए हैं।

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