फसल बर्बादी और आर्थिक तंगी से टूटा किसान, जालौन में पेड़ से लटककर दी जान—परिवार में मचा कोहराम

मटर और गेहूं की फसल खराब होने से बढ़ा तनाव, दो बच्चों की शादी की चिंता भी बनी वजह
रिपोर्ट-मुहम्मद साजिद जालौन |UPSAMVAD
उरई(जालौन): जालौन जनपद के उरई क्षेत्र में किसान संकट की एक और दुखद तस्वीर सामने आई है। सिरसाकलार थाना क्षेत्र के धमनी गांव में एक किसान ने फसल खराब होने और आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है, वहीं मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है।
मृतक की पहचान अवधेश अवस्थी (45 वर्ष) के रूप में हुई है, जो खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।
फसल खराबी ने बढ़ाई आर्थिक परेशानी
ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, इस वर्ष अवधेश अवस्थी की मटर और गेहूं की फसल खराब हो गई थी। लगातार नुकसान के चलते वह आर्थिक संकट से जूझ रहे थे।
बताया जा रहा है कि परिवार की जिम्मेदारियों और सीमित आय के कारण वह मानसिक रूप से भी काफी तनाव में थे। खासकर उनके दो बच्चों की शादी तय होने के कारण आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ गया था।
खेत में मिला शव, परिवार में मचा हड़कंप
सोमवार को अवधेश अवस्थी खेत पर भूसा उठाने के लिए गए थे, लेकिन काफी देर तक घर नहीं लौटे। इससे परिजनों को चिंता हुई। जब परिवार के लोग खेत पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि अवधेश गमछे के सहारे पेड़ से लटके हुए हैं।
यह दृश्य देखकर परिजनों के होश उड़ गए और उन्होंने शोर मचाया। आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिवार का रो-रोकर बुरा हाल, मदद की मांग
मृतक के परिवार में पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि अवधेश एक मेहनती किसान थे, लेकिन लगातार फसल खराब होने के कारण वह टूट चुके थे।
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि परिवार को इस कठिन समय में सहारा मिल सके।
किसान संकट पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण भारत में किसानों की आर्थिक स्थिति और कृषि पर निर्भरता से जुड़े जोखिमों को उजागर करती है। प्राकृतिक आपदाएं, फसल खराबी और बाजार की अनिश्चितता किसानों के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को समय पर सहायता, बीमा योजनाओं का लाभ और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।






