भारत-अमेरिका कृषि समझौते के विरुद्ध कोंच में आक्रोश: किसानों ने खेतों पर जलाईं समझौते की प्रतियां, बड़े आंदोलन की चेतावनी

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जालौन के कोंच में खेतों के बीच खड़े होकर भारत-अमेरिका कृषि समझौते की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करते भारतीय किसान यूनियन के सदस्य और स्थानीय किसान

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कोंच (जालौन): केंद्र सरकार द्वारा भारत और अमेरिका के बीच किए गए हालिया कृषि व्यापार समझौते को लेकर किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) तहसील इकाई कोंच के आह्वान पर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में किसानों ने इस समझौते के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पूर्व प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत, किसानों ने अपने-अपने खेतों पर एकत्रित होकर समझौते की प्रतियों को अग्नि के हवाले किया और केंद्र सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की।

विदेशी कंपनियों के हित में है समझौता: भाकियू

​विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसानों और संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह समझौता भारतीय कृषि व्यवस्था की रीढ़ तोड़ने वाला है। किसानों का तर्क है कि इस समझौते के माध्यम से केंद्र सरकार ने विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार के दरवाजे खोल दिए हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि समझौते के तहत कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम किए जाने से अमेरिका के भारी सब्सिडी वाले सस्ते कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में भर जाएंगे। इससे स्थानीय किसानों की उपज की मांग कम होगी और वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे, जिससे उन्हें अपनी फसल का न्यूनतम लागत मूल्य मिलना भी मुश्किल हो जाएगा।

सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

​संगठन के तहसील महासचिव डॉ. पीडी निरंजन ने प्रदर्शन के दौरान सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह समझौता सीधे तौर पर किसानों की आजीविका पर प्रहार है। उन्होंने कहा, “सरकार एक तरफ किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, तो दूसरी तरफ ऐसे समझौते कर रही है जो किसानों को उनकी अपनी जमीन पर मजदूर बना देंगे। हम अपनी जमीन और आजीविका के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।” डॉ. निरंजन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस जनविरोधी समझौते को तत्काल प्रभाव से रद्द नहीं किया, तो संगठन के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

खेतों से उठी ‘इंसाफ’ की आवाज

​तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों में विरोध का स्वरूप काफी आक्रामक रहा। किसानों ने हाथों में समझौते की प्रतियां लेकर ‘कृषि समझौता वापस लो’ और ‘किसानों के साथ अन्याय बंद करो’ जैसे गगनभेदी नारे लगाए। प्रदर्शन में शामिल किसान जगदीश, सरजू, भवानी शंकर और पप्पू ने कहा कि वे अपनी मिट्टी की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार विदेशी ताकतों के दबाव में आने के बजाय घरेलू किसानों के लिए ठोस और लाभकारी नीतियां बनाए।

इन गांवों में दर्ज हुआ विरोध

​कोंच तहसील के अंतर्गत आने वाले विभिन्न क्षेत्रों में इस विरोध प्रदर्शन का व्यापक असर देखा गया। अलग-अलग गांवों में आयोजित इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन में मुख्य रूप से मानसिंह, राजेंद्र, मनोज, राघवेंद्र, लल्ला भइया, प्रदीप, आनंद, रामजी, मोहन समेत भारी संख्या में अन्नदाता शामिल हुए। किसानों ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई केवल एक समझौते की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।

​इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर जिले में किसान राजनीति को गरमा दिया है। अब देखना यह है कि स्थानीय प्रशासन और सरकार किसानों की इस नाराजगी पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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