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डीएम की शक्ति: मानकों की अनदेखी पर उखड़ेगी सड़क, ठेकेदार और अधिकारियों पर FIR के निर्देश

जालौन जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय उरई में नगर पालिका द्वारा बनाई जा रही सड़क का औचक निरीक्षण करते हुए और घटिया निर्माण सामग्री की जांच करते हुए।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन): जनपद में विकास कार्यों की गुणवत्ता से समझौता करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों की अब खैर नहीं है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए नगर पालिका परिषद द्वारा कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य में भारी अनियमितता पकड़ी है। औचक निरीक्षण के दौरान मिली खामियों से क्षुब्ध जिलाधिकारी ने न केवल सड़क को दोबारा बनाने के आदेश दिए, बल्कि सख्त चेतावनी दी है कि सुधार न होने पर संबंधितों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

​औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप

​जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने शुक्रवार को राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उरई रेलवे स्टेशन से बेरी वाले बाबा मजार होते हुए राठ रोड ओवर ब्रिज के नीचे तक हो रहे डामरीकरण कार्य का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वे सुशील नगर और दयानंद वैदिक कॉलेज के समीप चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लेने पहुंचे। जिलाधिकारी के अचानक मौके पर पहुँचने से विभाग और ठेकेदारों के बीच हड़कंप मच गया।

​मानकों की धज्जियां: BC की जगह PC का खेल

​निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जब निर्माण सामग्री और तकनीक की जांच की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। दयानंद वैदिक कॉलेज के पास नगर पालिका परिषद द्वारा कराए जा रहे डामरीकरण में भारी धांधली पाई गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि सड़क निर्माण में निर्धारित बीसी (बिटुमिनस कंक्रीट) की मानक मात्रा का प्रयोग नहीं किया गया था। इसकी जगह पीसी (प्रीमिक्स्ड कारपेटिंग) सामग्री का उपयोग कर औपचारिकता पूरी की जा रही थी। जिलाधिकारी ने तकनीकी विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि इस तरह के घटिया निर्माण से भारी वाहनों का दबाव पड़ते ही सड़क कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त हो जाएगी, जिससे जनता के पैसे की बर्बादी होगी।

​10 मार्च तक का अल्टीमेटम और ब्लैकलिस्टिंग की चेतावनी

​जिलाधिकारी ने मौके पर ही मौजूद अधिशासी अधिकारी और विभागीय इंजीनियरों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिया कि मानकों के विरुद्ध बनी इस सड़क को तत्काल उखाड़ा जाए और इसे दोबारा बीसीसी (बिटुमिनस कंक्रीट) मानकों के अनुरूप बनाया जाए। प्रशासन ने इसके लिए 10 मार्च तक की समयसीमा तय की है।

​डीएम राजेश कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट लहजे में कहा:

​”जनता की सुविधाओं के लिए आने वाले सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि 10 मार्च तक सड़क का पुनः निर्माण मानकों के अनुसार नहीं पाया गया, तो संबंधित दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके साथ ही ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर उसका पूर्ण भुगतान शून्य कर दिया जाएगा।”

​भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार

​प्रशासन के इस सख्त रुख ने उन ठेकेदारों की नींद उड़ा दी है जो सांठगांठ कर विकास कार्यों में धांधली करते आए हैं। जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान अन्य विकास परियोजनाओं की फाइलों को भी तलब किया है। उन्होंने साफ किया कि जनपद में चल रहे हर निर्माण कार्य की थर्ड पार्टी जांच कराई जा सकती है और यदि कहीं भी गुणवत्ता में कमी मिली, तो रिकवरी की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।

​इस कार्रवाई से उरई के नागरिकों में खुशी की लहर है, क्योंकि रेलवे स्टेशन और राठ रोड जैसे व्यस्ततम इलाकों में गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण से लंबे समय तक आवागमन सुगम रहेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन के इस हंटर के बाद विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर मानकों को पूरा कर पाता है या नहीं।

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