दहेज के लोभियों को मिली कड़ी सजा: शकीला हत्याकांड में पति को आजीवन कारावास, अदालत ने सुनाई ‘दहेज की बलि’ पर ऐतिहासिक सजा

0
​जालौन जिला न्यायालय परिसर जहाँ न्यायाधीश ने शकीला दहेज हत्या मामले में मुख्य अभियुक्त यूसुफ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

उरई (जालौन): जनपद जालौन के जिला सत्र न्यायालय ने दहेज हत्या के एक रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य अभियुक्त यूसुफ उर्फ रहीश को अपनी पत्नी शकीला की जहर देकर हत्या करने का दोषी पाते हुए ‘आजीवन कारावास’ (उम्रकैद) की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही, इस जघन्य अपराध में सहयोग करने वाले परिवार के अन्य चार सदस्यों को भी कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया है।

शादी का झांसा और दहेज की क्रूर मांग

अभियोजन पक्ष की दलीलों और वादी रसूल अहमद के बयानों के अनुसार, यह मामला धोखे और लालच की पराकाष्ठा था। अभियुक्त यूसुफ उर्फ रहीश ने रसूल अहमद की पुत्री शकीला को शादी का झांसा देकर अपने घर में पत्नी की तरह रखा था। लेकिन जब निकाह की औपचारिक बात आई, तो यूसुफ और उसके परिजनों का असली चेहरा सामने आ गया। उन्होंने शकीला के परिवार से दो लाख रुपये नकद, टीवी, फ्रिज और एक मोटरसाइकिल की मांग की। गरीबी और सीमित संसाधनों के कारण जब पिता यह मांग पूरी करने में असमर्थ रहे, तो शकीला का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न शुरू कर दिया गया। उसे आए दिन जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।

26 जनवरी की वह काली रात: षड्यंत्र और हत्या

दहेज की मांग पूरी न होने पर अभियुक्तों ने खूनी साजिश रची। 26 जनवरी 2011 की शाम को यूसुफ ने अपने पिता इस्माइल महते, चाचा लल्लू, भाई हनीफ और बहनों के साथ मिलकर एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत शकीला को धोखे से घातक कीटनाशक जहर खिला दिया। जब शकीला की हालत बिगड़ने लगी, तो उसे बचाने के बजाय आरोपी उसे मरा हुआ समझकर बगीचे के गेट पर फेंककर फरार हो गए। पुलिस ने गंभीर अवस्था में उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन अगले ही दिन 27 जनवरी 2011 को उपचार के दौरान शकीला ने दम तोड़ दिया।

विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट ने खोली पोल

इस मामले में सबसे निर्णायक मोड़ तब आया जब मृतिका के विसरा की जांच रिपोर्ट आगरा स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला से प्राप्त हुई। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से ‘ऑर्गेनोक्लोरो’ नामक कीटनाशक विष पाए जाने की पुष्टि हुई। इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने अभियुक्तों के उन दावों को ध्वस्त कर दिया जिसमें वे मौत को सामान्य बता रहे थे। अपर शासकीय अधिवक्ता महेंद्र विक्रम द्वारा की गई प्रभावी पैरवी और ठोस तथ्यों ने अदालत के सामने यह सिद्ध कर दिया कि यह एक सुनियोजित दहेज हत्या थी।

न्यायालय का कड़ा रुख और मुआवजा

न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य अभियुक्त यूसुफ को आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, उसके पिता और बहनों सहित 4 अन्य रिश्तेदारों को क्रूरता के मामले में 3-3 साल की सजा और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत 2-2 साल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने एक मानवीय रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि अभियुक्तों पर लगाए गए जुर्माने की आधी राशि (50%) मृतिका के वृद्ध पिता रसूल अहमद को प्रतिकर (मुआवजे) के रूप में दी जाए।

​इस फैसले के बाद न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। कानून के जानकारों का मानना है कि इस तरह के कड़े फैसले समाज में दहेज के लोभियों के मन में कानून का खौफ पैदा करेंगे और महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में कमी लाएंगे।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

Leave a Reply

You may have missed