जालौन: बार काउंसिल उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए कोंच में मतदान संपन्न, दो दिनों में 91% वकीलों ने किया मताधिकार का प्रयोग

कोंच(जालौन): बार काउंसिल उत्तर प्रदेश के चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बुधवार को मतदान के दूसरे और अंतिम दिन कोंच तहसील परिसर स्थित सिविल जज जूनियर डिवीजन न्यायालय में वकीलों ने बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। लोकतंत्र के इस महापर्व में अधिवक्ताओं ने अपनी एकजुटता और जागरूकता का परिचय देते हुए भविष्य की बार काउंसिल के लिए प्रतिनिधि चुनने हेतु लंबी कतारों में लगकर वोट डाले।
दो दिनों का मतदान गणित: वकीलों में दिखा भारी उत्साह
कोंच बार एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, यहां कुल 235 पंजीकृत मतदाता अधिवक्ता हैं। मतदान के लिए दो दिन, यानी 20 और 21 जनवरी का समय निर्धारित किया गया था।
- पहले दिन (मंगलवार): मतदान की धीमी शुरुआत के बावजूद पहले दिन कुल 86 अधिवक्ताओं ने अपने मत का प्रयोग किया था।
- दूसरे दिन (बुधवार): आखिरी दिन होने के कारण वकीलों का उत्साह चरम पर रहा। सुबह 10 बजे से शुरू हुए मतदान में शाम 5 बजे तक कुल 128 वकीलों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
- कुल मतदान: दोनों दिनों को मिलाकर कुल 214 अधिवक्ताओं ने मतदान में हिस्सा लिया। हालांकि, 21 वकीलों ने किन्हीं कारणों से मतदान प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो कोंच में करीब 91% मतदान दर्ज किया गया, जो कि एक सराहनीय आंकड़ा है।
कड़ी सुरक्षा और न्यायिक निगरानी में संपन्न हुई प्रक्रिया
चुनाव को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। तहसील स्तर पर मुंसिफ कोर्ट (सिविल जज जूनियर डिवीजन) को मतदान केंद्र बनाया गया था। पूरी निर्वाचन प्रक्रिया चुनाव अधिकारी एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट उरई प्रत्युष प्रकाश और चुनाव सहायक लिपिक जेएम कोंच शशिकांत मिश्रा की सीधी देखरेख में संपन्न हुई। मतदान के दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध रहे और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल भी मुस्तैद रहा।
333 प्रत्याशी और मतदान की जटिल प्रक्रिया
बार काउंसिल उत्तर प्रदेश का यह चुनाव काफी व्यापक है, जिसमें पूरे प्रदेश से कुल 333 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें से केवल 25 प्रत्याशियों का निर्वाचन होना है, जो अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए काउंसिल का हिस्सा बनेंगे। इस चुनाव की खास बात यह है कि प्रत्येक मतदाता अधिवक्ता को अपनी पसंद के 25 वोट देने का अधिकार प्रदान किया गया है। यही कारण है कि मतदान प्रक्रिया में समय भी अधिक लगा और वकीलों को काफी सोच-समझकर अपने मतपत्र भरने पड़े।
अधिवक्ताओं का कहना है कि वे एक ऐसी बार काउंसिल चाहते हैं जो वकीलों के कल्याण, सुरक्षा और उनके मान-सम्मान के लिए मजबूती से कार्य करे। अब सभी को चुनाव के परिणामों का इंतजार है।
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