​जालौन: चूल्हे की चिंगारी ने धारण किया विकराल रूप, मूर्ति निर्माण के लिए रखी घास जलकर राख; बड़ा हादसा टला

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जालौन के मोहल्ला नारो भास्कर में चूल्हे की चिंगारी से घास के ढेर में लगी भीषण आग का दृश्य।

जालौन: जालौन कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नारो भास्कर में शुक्रवार को एक भीषण अग्निकांड की घटना सामने आई। दोपहर के समय खाना बनाते वक्त चूल्हे से निकली एक मामूली सी चिंगारी ने देखते ही देखते तबाही का मंजर पैदा कर दिया। इस आग की चपेट में आने से मूर्ति निर्माण के लिए संचित की गई भारी मात्रा में सूखी घास जलकर खाक हो गई। गनीमत यह रही कि स्थानीय लोगों और फायर ब्रिगेड की तत्परता से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ा रिहायशी इलाका खाक होने से बच गया।

कैसे शुरू हुई आग: घटना का पूरा विवरण

​घटना जालौन कोतवाली के अंतर्गत आने वाले मोहल्ला नारो भास्कर की है। यहाँ के निवासी राम कुशवाहा और लखन कुशवाहा का परिवार पिछले कई दिनों से आगामी नवरात्रि पर्व की तैयारियों में जुटा हुआ था। यह परिवार देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियां बनाने का पारंपरिक कार्य करता है। मूर्तियों के ढांचे को मजबूती देने और उन्हें आकार देने के लिए घर के एक हिस्से में बड़ी मात्रा में सूखी घास (पुआल) का भंडारण किया गया था।

​शुक्रवार की दोपहर घर की रसोई में खाना पकाने का काम चल रहा था। तभी अचानक मिट्टी के चूल्हे से एक दहकती हुई चिंगारी छिटककर पास में ही रखी सूखी घास के ढेर पर जा गिरी। घास सूखी होने के कारण उसने तुरंत आग पकड़ ली। जब तक घर के लोग कुछ समझ पाते, आग की लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे इलाके में काले धुएं का गुबार छा गया।

चीख-पुकार और स्थानीय लोगों का संघर्ष

​जैसे ही आग की लपटें घर की छतों से ऊपर उठती दिखाई दीं, परिजनों में चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर मोहल्ले के दर्जनों लोग बाल्टियाँ और पाइप लेकर मौके पर दौड़ पड़े। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने सूझबूझ का परिचय दिया और आसपास के घरों में लगी समरसेबल (Submersible) पंपों की कई पाइप लाइनें मौके पर खींच लीं।

​ग्रामीणों ने एक साथ मिलकर पानी की बौछारें शुरू कीं ताकि आग को पड़ोसी मकानों तक फैलने से रोका जा सके। आग इतनी तेज थी कि सूखी घास के जलने से उठने वाला ताप असहनीय हो रहा था, लेकिन लोगों ने साहस नहीं छोड़ा।

पुलिस और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई

​इसी बीच, गश्त पर मौजूद यूपी 112 डायल वाहन संख्या 3629 के पुलिसकर्मियों की नजर धुएं के गुबार पर पड़ी। उन्होंने बिना समय गंवाए स्थिति का आकलन किया और तुरंत फायर स्टेशन को सूचित किया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया और बचाव कार्य में मदद की।

​सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुँची। हालांकि, तब तक स्थानीय लोग आग पर काफी हद तक नियंत्रण पा चुके थे, लेकिन दमकलकर्मियों ने पूरी तरह से आग को बुझाया और कूलिंग प्रक्रिया शुरू की ताकि घास के ढेर के अंदर दबी कोई भी चिंगारी दोबारा आग न भड़का सके।

आर्थिक नुकसान और टला बड़ा खतरा

​इस अग्निकांड में राम और लखन कुशवाहा को भारी आर्थिक क्षति पहुँची है। नवरात्रि के सीजन के लिए उन्होंने जो मेहनत की थी और जो कच्चा माल (सूखी घास) इकट्ठा किया था, वह पूरी तरह जलकर राख हो गया। पीड़ितों के अनुसार, इस नुकसान से मूर्तियों के निर्माण कार्य में बाधा आएगी।

​हालांकि, इस घटना का सुखद पहलू यह रहा कि कोई जनहानि नहीं हुई। मोहल्ला नारो भास्कर एक घनी आबादी वाला क्षेत्र है, यदि आग पर नियंत्रण पाने में 10-15 मिनट की भी देरी होती, तो यह लपटें आसपास के कच्चे और पक्के मकानों को अपनी चपेट में ले सकती थीं, जिससे भारी तबाही मच सकती थी।

सावधानी की अपील

​कोतवाली पुलिस और प्रशासन ने इस घटना के बाद लोगों से अपील की है कि गर्मी और शुष्क मौसम में आग के प्रति विशेष सावधानी बरतें। विशेषकर घास, कबाड़ या ज्वलनशील पदार्थों के पास खुले चूल्हे या बीड़ी-सिगरेट का प्रयोग न करें।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

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