जालौन: दिव्यांग बच्चों के हौसलों को मिले सहायक उपकरणों के ‘पंख’, जिलाधिकारी ने कहा—’दिव्यांगता कमजोरी नहीं, एक चुनौती है’

उरई/डाकोर (जालौन): जनपद के दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशासन ने एक सराहनीय कदम उठाया है। सोमवार को विकासखंड डाकोर के बीआरसी मडोरा में एक भव्य उपकरण वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से दर्जनों बच्चों के चेहरे पर उस वक्त मुस्कान तैर गई, जब उन्हें अपनी शारीरिक बाधाओं को कम करने के लिए आधुनिक सहायक उपकरण प्राप्त हुए।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय, मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के.के. सिंह और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) चन्द्रप्रकाश ने माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान स्कूली बच्चों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया।
168 बच्चों को मिले 218 सहायक उपकरण
समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि एएलआईएमसीओ (ALIMCO) कानपुर के तकनीकी सहयोग से इस शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 168 दिव्यांग बच्चों का चयन किया गया था, जिन्हें उनकी आवश्यकता के अनुसार कुल 218 सहायक उपकरण एवं उपस्कर वितरित किए गए। इन उपकरणों में ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, श्रवण यंत्र (कान की मशीन) और ब्रेल किट जैसे महत्वपूर्ण साधन शामिल हैं, जो इन बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने और दैनिक कार्यों को सुगम बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
आत्मविश्वास से जीतें दुनिया: जिलाधिकारी
उपस्थित बच्चों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि “दिव्यांगता किसी भी व्यक्ति की कमजोरी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी चुनौती है जिसे दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ अवसर में बदला जा सकता है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आज देश और दुनिया में दिव्यांग बच्चे खेल, विज्ञान और कला के क्षेत्र में सामान्य बच्चों से भी बेहतर प्रदर्शन कर समाज को प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को बोझ न समझें, बल्कि उन्हें शिक्षित कर उनके सपनों को साकार करने में मदद करें।
इनका रहा विशेष सहयोग
एएलआईएमसीओ कानपुर की टीम से अब्दुल रहमान, प्रेरणा और मोहनलाल ने बच्चों के परीक्षण और सटीक उपकरण चयन में तकनीकी सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन दीपक पाण्डेय एवं जिला समन्वयक समेकित शिक्षा ने संयुक्त रूप से किया।
इस पुनीत कार्य को सफल बनाने में स्पेशल एजुकेटर नीरज पांचाल, मनीष कुमार, ईश्वर चन्द्र पाल, जगत सिंह पाल, संदीप दीक्षित, कपूरी देवी, वर्षा बिश्नोई, रोहित कुमार और राजेश कुमार सहित शिक्षा विभाग के तमाम कार्मिकों का विशेष योगदान रहा।
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