जालौन: गौशाला निरीक्षण में दिखा जिलाधिकारी का संवेदनशील चेहरा; गोवंशों को किया दुलार, लापरवाही पर अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी

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जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय बबीना गौशाला में गोवंशों को गुड़ खिलाते और दुलार करते हुए, साथ में पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार।

जालौन: गौशाला निरीक्षण में दिखा जिलाधिकारी का संवेदनशील चेहरा; गोवंशों को किया दुलार, लापरवाही पर अधिकारियों को दी सख्त चेतावनीजालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय बबीना गौशाला में गोवंशों को गुड़ खिलाते और दुलार करते हुए, साथ में पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार।

उरई(जालौन): उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में शामिल गोवंश संरक्षण की ज़मीनी हकीकत परखने के लिए जालौन जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। इसी क्रम में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने जनपद के बबीना एवं कदौरा स्थित ‘कान्हा गौशालाओं’ का आकस्मिक स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान जहाँ एक ओर जिलाधिकारी का गौवंश के प्रति बेहद संवेदनशील और आत्मीय रूप देखने को मिला, वहीं व्यवस्थाओं में कमी पाए जाने पर उन्होंने मातहत अधिकारियों की जमकर क्लास भी लगाई।

पुकार सुनते ही जिलाधिकारी की ओर दौड़ पड़े गोवंश

​निरीक्षण के दौरान बबीना गौशाला में एक अत्यंत भावुक और विरल दृश्य देखने को मिला। जैसे ही जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने गौशाला परिसर में प्रवेश कर स्नेहपूर्ण स्वर में गोवंशों को पुकारा, वैसे ही कई गोवंश दौड़ते हुए उनके समीप आ गए। जिलाधिकारी ने भी एक अभिभावक की भांति उन्हें दुलारा और अपने हाथों से गुड़ खिलाया। उनके साथ मौजूद पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने भी गोवंशों को चारा और गुड़ खिलाकर उनकी स्थिति का जायजा लिया। जिलाधिकारी का यह पशु प्रेम वहां मौजूद कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

साफ-सफाई पर भड़के डीएम: लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई के संकेत

​संवेदनशीलता के साथ-साथ जिलाधिकारी का सख्त रुख भी निरीक्षण के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। गौशाला परिसर में गंदगी और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था न होने पर उन्होंने गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और गौशाला प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सफाई के मामले में कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​जिलाधिकारी ने स्पष्ट लहजे में निर्देश दिए कि:

  • अनिवार्य सफाई: गौशाला परिसर में सुबह और शाम दोनों समय अनिवार्य रूप से सफाई की जाए।
  • आहार एवं जल: गोवंशों के लिए 24 घंटे स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त मात्रा में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
  • चिकित्सा सुविधा: बीमार गोवंशों की नियमित चिकित्सीय जांच की जाए और उनके लिए पृथक (Isolation) वार्ड की व्यवस्था बनी रहे।

सुरक्षा और अनुशासन पर पुलिस अधीक्षक का जोर

​निरीक्षण में साथ रहे पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने गौशाला की सुरक्षा व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने गौशाला प्रबंधन को निर्देशित किया कि परिसर के आसपास सुरक्षा और अनुशासन बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि गोवंशों के संरक्षण में किसी भी प्रकार की बाहरी बाधा या सुरक्षा में चूक होने पर संबंधित के विरुद्ध पुलिसिया कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

प्रशासनिक सतर्कता और भविष्य की कार्ययोजना

​निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि गौशाला संचालन केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एक पुनीत कार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी भी गौशाला में गोवंशों के संरक्षण में लापरवाही मिली, तो संबंधित ग्राम विकास अधिकारी, सचिव और प्रबंधन के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

​इस निरीक्षण के दौरान मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। प्रशासन की इस सक्रियता से जनपद की अन्य गौशालाओं के प्रबंधन में भी हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है।

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