जालौन: श्मशान घाट पर मधुमक्खियों का तांडव; जलती चिता छोड़ भागे ग्रामीण, हमले में 50 से अधिक घायल

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जालौन के कदौरा में श्मशान घाट पर मधुमक्खियों के हमले के बाद मची अफरा-तफरी और घायल ग्रामीणों का अस्पताल में उपचार

जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक बुजुर्ग के अंतिम संस्कार के दौरान प्रकृति के भीषण प्रकोप ने मातम को चीख-पुकार में बदल दिया। कदौरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम महमूद नगर (डाले का पुरवा बड़ा गांव) में गुरुवार दोपहर अंतिम संस्कार की रस्मों के बीच मधुमक्खियों के एक विशाल झुंड ने हमला बोल दिया। इस हमले में करीब 50 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है।

कैसे शुरू हुआ मौत का तांडव?

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, महमूद नगर निवासी 78 वर्षीय वीर सिंह का बुधवार को निधन हो गया था। गुरुवार को उनके परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम विदाई देने के लिए गांव के ही श्मशान घाट पहुंचे थे। चश्मदीदों के मुताबिक, जैसे ही चिता को मुखाग्नि दी गई और धुंआ उठना शुरू हुआ, पास के पेड़ पर लगा मधुमक्खियों का विशाल छत्ता अचानक भड़क गया।

​देखते ही देखते हजारों मधुमक्खियों ने श्मशान घाट पर मौजूद लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। धुएं और गर्मी से उग्र हुई मधुमक्खियों ने लोगों पर इस कदर हमला किया कि वहां मौजूद परिजनों को अपने प्रियजन की जलती हुई चिता को बीच में ही छोड़कर अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।

​हमले की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोग अपनी जान बचाने के लिए करीब 500 मीटर दूर स्थित झाड़ियों और जंगल की ओर भागे। मधुमक्खियों ने ग्रामीणों का पीछा नहीं छोड़ा। बचने के लिए कई लोग जमीन पर लेट गए, लेकिन हमला जारी रहा। इस हमले में मृतक वीर सिंह के पुत्र चंद्रशेखर उर्फ चंदू, धीरू, नेता, देवी चरण और विजय शर्मा समेत 50 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

​मधुमक्खियों के डंक से तीन ग्रामीण मौके पर ही अचेत (बेहोश) होकर गिर पड़े। घायलों के चेहरे, सिर और आंखों पर गंभीर सूजन आ गई है, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

अधूरी रह गई अंत्येष्टि की प्रक्रिया

​इस अप्रत्याशित हमले के कारण श्मशान घाट पर अफरा-तफरी मच गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि समाचार लिखे जाने तक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। ग्रामीण इस कदर डरे हुए थे कि वे दोबारा श्मशान घाट की ओर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। गांव में शोक के साथ-साथ अब दहशत का माहौल व्याप्त है।

स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप

​घटना के तुरंत बाद घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कदौरा ले जाया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घटना की सूचना खंड विकास अधिकारी (BDO) संदीप मिश्रा को तत्काल दे दी गई थी, लेकिन चिकित्सा टीम मौके पर काफी देरी से पहुंची। यदि समय पर उपचार मिल जाता, तो घायलों की स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। फिलहाल, CHC में घायलों का उपचार जारी है और कुछ का इलाज गांव में ही स्थानीय स्तर पर कराया जा रहा है।

​प्रशासन अब इस मामले की जांच और प्रभावितों को उचित सहायता पहुँचाने की बात कह रहा है, लेकिन इस घटना ने श्मशान घाटों के आसपास सुरक्षा और सफाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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