झांसी लिंक एक्सप्रेसवे: उचित मुआवजे की मांग को लेकर जालौन के किसानों ने खोला मोर्चा; सर्किल रेट बढ़ाने के लिए DM को सौंपा ज्ञापन

उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक ‘झांसी लिंक एक्सप्रेसवे’ के निर्माण की प्रक्रिया अब भूमि अधिग्रहण के विवादों के घेरे में आती दिख रही है। जालौन जनपद के ग्राम गोरन में अधिग्रहित की जा रही कृषि भूमि के मुआवजे को लेकर किसानों में गहरा असंतोष व्याप्त है। सोमवार को बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर प्रशासन के समक्ष अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और सर्किल रेट में तत्काल संशोधन की मांग की।
पुराने सर्किल रेट पर अधिग्रहण: किसानों का आर्थिक नुकसान
ग्रामीणों का मुख्य तर्क यह है कि प्रशासन जिस दर पर भूमि का अधिग्रहण कर रहा है, वह वर्तमान बाजार मूल्यों (Market Rates) से कोसों दूर है। किसानों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि वर्तमान में लागू सर्किल रेट कई वर्ष पुराने डेटा पर आधारित हैं। पिछले कुछ वर्षों में एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की घोषणा के बाद क्षेत्र में जमीन की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसे प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है।
किसानों के अनुसार, “प्रशासन केवल कागजी दरों को आधार बना रहा है, जबकि धरातल पर वास्तविकता इसके विपरीत है। कम दरों पर अधिग्रहण का सीधा अर्थ किसानों को उनके पैतृक हक से वंचित करना और उन्हें आर्थिक तबाही की ओर धकेलना है।”
उपजाऊ भूमि और आजीविका का संकट
ग्राम गोरन के किसानों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि अधिग्रहित की जाने वाली भूमि अत्यधिक उपजाऊ (Fertile Land) है और मुख्य सड़क के समीप स्थित होने के कारण इसका रणनीतिक और व्यावसायिक महत्व भी है। किसानों का कहना है कि उनकी आजीविका पूरी तरह से इसी भूमि पर निर्भर है। भले ही सरकार द्वारा ‘चार गुना मुआवजे’ का प्रावधान किया गया हो, लेकिन जब मूल सर्किल रेट ही बेहद कम होगा, तो चार गुना की राशि भी वर्तमान बाजार भाव के सामने नगण्य साबित होगी। ग्रामीणों ने चिंता जताई कि वर्तमान मुआवजे की राशि से वे भविष्य में कहीं और वैसी ही उपजाऊ जमीन खरीदने में सक्षम नहीं होंगे।
पुनः सर्वे और सर्किल रेट संशोधन की मांग
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
- संबंधित क्षेत्र का जनहित और राजस्व हित में पुनः सर्वे कराया जाए।
- वर्तमान बाजार मूल्यों का आकलन कर सर्किल रेट में सम्मानजनक वृद्धि की जाए।
- भूमि की श्रेणी और उसकी लोकेशन (सड़क के किनारे) के आधार पर विशेष अधिभार (Surcharge) तय किया जाए।
प्रशासनिक रुख और आंदोलन की चेतावनी
जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने किसानों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और मामले में यथोचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है। हालांकि, किसान अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने के मूड में नहीं हैं। ग्राम गोरन के समस्त ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनके हितों की अनदेखी की और सर्किल रेट में वृद्धि की प्रक्रिया शीघ्र शुरू नहीं की, तो वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए व्यापक आंदोलन और प्रदर्शन के लिए विवश होंगे।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान समेत गांव के दर्जनों किसान और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अब देखना यह होगा कि एक्सप्रेसवे के निर्माण की गति को बनाए रखने के लिए प्रशासन किसानों की इन जायज मांगों पर क्या रुख अपनाता है।

Rahul (रिपोर्टर,जालौन) जालौन जनपद में स्थानीय समाचारों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करते हैं।






