‘कोई भी मतदाता न छूटे’: जिलाधिकारी ने ग्राम रेवा में ग्रामीणों संग किया संवाद, मतदाता सूची की शुद्धता पर दिया जोर

उरई (जालौन): भारत निर्वाचन आयोग के “कोई भी मतदाता न छूटे” के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। इसी क्रम में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर)–2026 के अंतर्गत जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने तहसील क्षेत्र के ग्राम रेवा का दौरा किया। वहां उन्होंने चौपाल लगाकर ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद किया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नोटिस प्रक्रिया तथा निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।
पुनरीक्षण प्रक्रिया और नोटिस का महत्व
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद वर्तमान में गणना का महत्वपूर्ण चरण चल रहा है। उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं की मैपिंग वर्ष 2003 में हुए विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण की सूची से नहीं हो पाई है, प्रशासन उन्हें नियमानुसार नोटिस जारी कर रहा है। जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि जनपद के सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए इन नोटिसों पर विधिवत सुनवाई कर रहे हैं ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम सूची से न छूटे।
मतदाताओं की सुविधा के लिए नियमों में लचीलापन
प्रशासन ने इस बार मतदाताओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा है। जिलाधिकारी ने बताया कि नोटिस की सुनवाई के लिए मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में उपस्थित होने की अनिवार्य बाध्यता से छूट दी गई है। यदि कोई मतदाता स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ है, तो वह एक लिखित प्राधिकरण (Written Authorization) के माध्यम से अपने प्रतिनिधि को सुनवाई के लिए भेज सकता है। इसके अलावा, प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए बीएलओ (BLO) के माध्यम से भी घर-घर नोटिस पहुंचाए जा रहे हैं।
डिजिटल माध्यम से मिलेगी राहत
आधुनिक तकनीक का लाभ उठाते हुए जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को ऑनलाइन पोर्टल के उपयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि मतदाता भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर लॉग-इन कर अपने नोटिस की स्थिति जान सकते हैं। इसके साथ ही, वे अपने जवाब और आवश्यक सहायक दस्तावेजों को ऑनलाइन ही अपलोड कर सकते हैं, जिससे उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।
दस्तावेजों की श्रेणी और आयु संबंधी मानक
जिलाधिकारी ने जन्मतिथि के आधार पर प्रस्तुत किए जाने वाले अभिलेखों के बारे में विस्तार से समझाया, जो निम्नलिखित हैं:
- 01 जुलाई 1987 से पूर्व जन्म: ऐसे मतदाताओं को केवल स्वयं से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
- 01 जुलाई 1987 से 02 दिसंबर 2004 के मध्य जन्म: इन मतदाताओं को स्वयं के साथ माता या पिता में से किसी एक के दस्तावेज देने होंगे।
- 02 दिसंबर 2004 के बाद जन्म: इस श्रेणी के मतदाताओं को स्वयं के अलावा माता एवं पिता दोनों के वैध दस्तावेज जमा करने अनिवार्य होंगे। उन्होंने बताया कि जन्मतिथि और स्थान के प्रमाण के रूप में आयोग द्वारा निर्धारित 13 मान्य दस्तावेजों में से कोई भी एक दस्तावेज प्रस्तुत किया जा सकता है।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए सहयोग की अपील
संवाद के अंत में जिलाधिकारी ने समस्त ग्रामवासियों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया को गंभीरता से लें और समयबद्ध तरीके से अपने दस्तावेज उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि एक शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित मतदाता सूची ही एक सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला है। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मनोज अवस्थी, जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद सहित ग्राम प्रधान प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

Rahul (रिपोर्टर,जालौन) जालौन जनपद में स्थानीय समाचारों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करते हैं।






