​कोंच कोतवाली कांड की 22वीं बरसी: जब पुलिस की गोलियों से थर्रा उठा था जालौन; शहीदों की याद में नम हुईं आंखें

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ग्राम तीतरा खलीलपुर स्थित महेंद्र सिंह-सुरेंद्र सिंह-दयाशंकर मेमोरियल महाविद्यालय में शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित करते परिजन और गणमान्य नागरिक

ग्राम तीतरा खलीलपुर स्थित महेंद्र सिंह-सुरेंद्र सिंह-दयाशंकर मेमोरियल महाविद्यालय में शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित करते परिजन और गणमान्य नागरिक

कोंच (जालौन) : उत्तर प्रदेश के पुलिस इतिहास में ‘काला अध्याय’ माना जाने वाला 1 फरवरी का वह दिन, आज भी जालौन की स्मृतियों में गहरा ज़ख्म बनकर ताज़ा है। आज से ठीक 22 वर्ष पूर्व, वर्ष 2004 में 1 फरवरी को कोंच कोतवाली के भीतर पुलिसिया निरंकुशता की जो पराकाष्ठा हुई थी, उसकी बरसी पर रविवार को पूरा क्षेत्र गमगीन रहा। ग्राम तीतरा खलीलपुर स्थित महेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह, दयाशंकर मेमोरियल महाविद्यालय में इन तीनों अमर शहीदों की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहाँ परिजनों और क्षेत्रीय लोगों ने नम आँखों से अपने नायकों को याद किया।

क्या था वह खौफनाक ‘कोतवाली कांड’?

​घटना 1 फरवरी 2004 की है। तत्कालीन पुलिस व्यवस्था की तानाशाही और निरंकुश कार्यशैली का विरोध करना तीन निर्दोषों के लिए काल बन गया था। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के तत्कालीन मंडलीय पदाधिकारी महेंद्र सिंह निरंजन, उनके अनुज और सपा की प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्य व मथुरा प्रसाद महाविद्यालय प्रबंध समिति के तत्कालीन मंत्री सुरेंद्र सिंह निरंजन, एवं उनके अभिन्न मित्र दयाशंकर झा को कोतवाली के भीतर बुलाकर तत्कालीन कोतवाल देवदत्त सिंह राठौर ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से अंधाधुंध गोलियां चलाकर मौत के घाट उतार दिया था।

​इस घटना ने न केवल जालौन बल्कि पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद, मुख्य अभियुक्त देवदत्त राठौर की जेल में निरुद्ध रहते हुए मृत्यु हो गई, जबकि अन्य दोषी पुलिसकर्मियों को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिससे इस जघन्य कांड में न्याय की जीत हुई।

यज्ञ-हवन और शांति पाठ से दी गई श्रद्धांजलि

​शहीदों की 22वीं बरसी के अवसर पर तीतरा खलीलपुर स्थित मेमोरियल महाविद्यालय में गायत्री शांति पाठ और विशाल हवन का आयोजन किया गया। मंत्रोच्चारण के बीच उपस्थित लोगों ने आहुतियां दीं और शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके पश्चात, महाविद्यालय परिसर में स्थापित तीनों शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पचक्र अर्पित किए गए।

​इस दौरान उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे इन शहीदों द्वारा जलाए गए अन्याय विरोधी मशाल को बुझने नहीं देंगे। वक्ताओं ने कहा कि महेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह और दयाशंकर झा ने समाज के सम्मान के लिए अपनी शहादत दी, जिसे आने वाली पीढ़ियां सदैव याद रखेंगी।

परिजनों और गणमान्य नागरिकों का जमावड़ा

​श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शहीदों के परिवार भावुक नजर आए। कार्यक्रम में स्व. महेंद्र सिंह की पत्नी व महाविद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष मीरा देवी, स्व. सुरेंद्र सिंह की पत्नी विनीता देवी, पुत्र राजू निरंजन, अंकित, अमरेंद्र, अनुपम, और स्व. दयाशंकर की पत्नी ऊषा देवी व पुत्र रत्नेश झा ने प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया।

​साथ ही महाविद्यालय की नींव रखने वाले विजय सिंह निरंजन (एडवोकेट धनौरा), प्रबंधक शिवप्रसाद निरंजन, कोषाध्यक्ष हरिमोहन निरंजन, मंत्री डॉ. टीआर निरंजन समेत प्रवक्ता डॉ. राजेश निरंजन, डॉ. सरोजलता गुप्ता और बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि ये तीनों विभूतियां कोंच के स्वाभिमान का प्रतीक हैं।

​इस श्रद्धांजलि सभा ने एक बार फिर उस दर्दनाक याद को ताज़ा कर दिया, जिसने कोंच की मिट्टी को अपनों के लहू से लाल होते देखा था।

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