​कोंच में युवती के अपहरण पर बवाल: सपा नेता की रिहाई से भड़का हिंदू समाज, ‘लव जिहाद’ का आरोप लगा तहसील घेरी

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कोंच में हिंदू युवती के अपहरण और कथित लव जिहाद मामले के विरोध में सरोजिनी नायडू पार्क से तहसील तक जुलूस निकालते हिंदू संगठनों के सैकड़ों प्रदर्शनकारी।

कोंच (जालौन): जनपद के कोंच कस्बे में एक हिंदू युवती के अपहरण का मामला अब एक बड़े सांप्रदायिक और राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है। पुलिस की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हिंदू संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने शुक्रवार को सड़कों पर उतरकर जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट आरोप है कि यह मामला ‘लव जिहाद’ से जुड़ा है और पुलिस प्रशासन राजनैतिक दबाव में आकर मुख्य आरोपियों को संरक्षण दे रहा है।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल: आरोपी की रिहाई ने सुलगाई आग

​पूरे विवाद की जड़ पुलिस की वह कार्रवाई है, जिसमें समाजवादी पार्टी के नेता और सपा मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के बर्खास्त जिलाध्यक्ष रिजवान मंसूरी उर्फ छोटू टाइगर को हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया गया। पीड़ित परिवार और हिंदू संगठनों का कहना है कि जब रिजवान मंसूरी और उसके साथी उस्मान कुरैशी के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज हो चुकी थी, तो पुलिस ने किस आधार पर उसे कोतवाली से जाने दिया? इस घटना ने पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं, जिससे जनता का आक्रोश और अधिक भड़क गया।

सरोजिनी नायडू पार्क से तहसील तक विशाल जन-आक्रोश

​शुक्रवार को आक्रोश की लहर तब दिखी जब ब्राह्मण महासभा, सनाढ्य सभा और विभिन्न हिंदू संगठनों के बैनर तले सैकड़ों लोग सरोजिनी नायडू पार्क में एकत्रित हुए। यहाँ से एक विशाल जुलूस की शक्ल में प्रदर्शनकारी गगनभेदी नारेबाजी करते हुए तहसील परिसर पहुंचे। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और युवती की सकुशल वापसी के साथ-साथ आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

​हिंदू समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि आरोपी खुद को राजनीतिक रसूखदार बताकर कानून को चुनौती दे रहा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर आरोपी सपा नेता की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और इस आंदोलन को पूरे जिले में व्यापक रूप दिया जाएगा।

राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन, कड़े कानून की मांग

​तहसील मुख्यालय पहुँचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (SDM) ज्योति सिंह और क्षेत्राधिकारी (CO) परमेश्वर प्रसाद को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि:

  1. ​मुख्य आरोपी रिजवान मंसूरी और उस्मान कुरैशी को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
  2. ​मामले की जांच किसी उच्चाधिकारी से कराई जाए ताकि स्थानीय पुलिस के ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ की जांच हो सके।
  3. ​पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, तनावपूर्ण रहा माहौल

​आंदोलन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोतवाल अजीत सिंह, अतिरिक्त निरीक्षक लल्लू राम और मंडी चौकी प्रभारी नीतीश कुमार भारी पुलिस बल के साथ तैनात रहे। हालांकि माहौल काफी तनावपूर्ण रहा, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए।

प्रमुख हस्तियों की रही उपस्थिति

​इस बड़े विरोध प्रदर्शन में ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष धर्मेंद्र बबेले, मंत्री रंजन गोस्वामी, सनाढ्य सभा अध्यक्ष महेश तिवारी पिरौना, विज्ञान विशारद सीरौठिया, आशुतोष रावत और अंशुल शुक्ला खुर्द मुख्य रूप से शामिल रहे। साथ ही मोनू पंडित, जग्गू दादा, राहुल तिवारी, राघवेंद्र तिवारी, अखिलेश बबेले, ठाकुर शिशिर प्रताप सिंह, संतोष तिवारी, आकाश उदैनिया सहित सैकड़ों की संख्या में युवा और प्रबुद्ध वर्ग के लोग पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए।

​अब सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या प्रशासन 24 घंटे की समय सीमा के भीतर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज पाएगा या कोंच की सड़कों पर यह विरोध प्रदर्शन और उग्र रूप लेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

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