कोंच: ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ के उद्घोष के साथ मनाई गई संत रविदास जयंती; सभासद महेंद्र कुशवाहा ने बताया समाज सुधारक का महत्व

कोंच के गांधीनगर में सभासद महेंद्र कुशवाहा के आवास पर संत रविदास जी की 649वीं जयंती मनाते श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक
कोंच(जालौन) :“मन चंगा तो कठौती में गंगा” जैसे कालजयी संदेश के माध्यम से पूरी दुनिया को मानवता और समानता का पाठ पढ़ाने वाले महान संत शिरोमणि रविदास जी की 649वीं जयंती आज जनपद जालौन के कोंच कस्बे में अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। रविवार को मोहल्ला गांधीनगर में नगर पालिका सभासद एवं बसपा नगर अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा के आवास पर एक विशेष विचार गोष्ठी और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
पुष्पांजलि अर्पित कर लिया समाज सेवा का संकल्प
कार्यक्रम की शुरुआत संत रविदास जी के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित करने के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने अत्यंत श्रद्धाभाव से संत जी को नमन किया और उनके भजनों का स्मरण किया। इस अवसर पर पूरा परिसर “संत शिरोमणि रविदास महाराज की जय” के नारों से गुंजायमान रहा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को संत रविदास जी के विचारों और उनके संघर्षों से अवगत कराना था।
कुरीतियों के विरुद्ध अलख जगाने वाले महान क्रांतिकारी: महेंद्र कुशवाहा
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सभासद एवं बसपा नगर अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा ने संत रविदास जी के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “संत रविदास जी का जन्म वाराणसी में माघ पूर्णिमा के पावन दिन हुआ था। वे केवल एक धार्मिक संत नहीं थे, बल्कि एक महान समाज सुधारक और क्रांतिकारी कवि भी थे। उन्होंने उस दौर में समाज में व्याप्त छुआछूत, जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच की बुराइयों को जड़ से खत्म करने के लिए अलख जगाई थी।”
महेंद्र कुशवाहा ने आगे कहा कि संत जी ने अपनी सादगी और विचारों के माध्यम से यह सिद्ध किया कि ईश्वर की भक्ति के लिए आडंबरों की नहीं, बल्कि मन की शुद्धता की आवश्यकता होती है। उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपील की कि वे संत जी के पदचिह्नों पर चलकर एक समरस और न्यायप्रिय समाज के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें।
सामुदायिक सहभागिता और वैचारिक मंथन
जयंती कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज के आधुनिक युग में भी संत रविदास जी की शिक्षाएं उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी मध्यकाल में थीं। उनके द्वारा रचित पदों और दोहों में समानता, भाईचारे और श्रम के प्रति सम्मान का जो संदेश निहित है, वह राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य करता है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने यह शपथ ली कि वे समाज के वंचित वर्गों के उत्थान और सामाजिक न्याय के लिए निरंतर संघर्षरत रहेंगे।
प्रमुख हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रतिष्ठित नागरिकों की उपस्थिति सराहनीय रही। कार्यक्रम में मुख्य रूप से रूपसिंह कुशवाहा, गोलू गुर्जर, रोहित कुशवाहा, कृतिका, डॉ. राम सहित बड़ी संख्या में मोहल्लेवासी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने प्रसाद ग्रहण किया और एक-दूसरे को जयंती की शुभकामनाएं दीं।
कोंच में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि संत रविदास जी के प्रति लोगों की अटूट आस्था है और उनके विचार आज भी समाज का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
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