लोकतंत्र की मजबूती के लिए ‘पहले मतदान, फिर जलपान’: मथुरा प्रसाद महाविद्यालय में गूंजा जागरूकता का स्वर

कोंच (जालौन)। स्थानीय मथुरा प्रसाद स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शुक्रवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की इकाई द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने के उद्देश्य से एक दिवसीय सामान्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य केंद्र ‘वयस्क मतदाता जागरूकता अभियान’ रहा, जिसमें महाविद्यालय के प्रबुद्ध प्राध्यापकों और ऊर्जावान स्वयंसेवकों ने समाज के हर वर्ग को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने का संकल्प लिया।
मतदान: केवल अधिकार नहीं, परम कर्तव्य
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय विक्रम सिंह ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि मतदान केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सीधी भागीदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक जागरूक युवा ही सशक्त सरकार का चयन कर सकता है, जो देश के भविष्य की दिशा तय करती है।
‘सारे काम छोड़ दो, पहले वोट दो’ का उद्घोष
एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी लवकेश कुमार ने युवाओं में जोश भरते हुए नारा दिया— “सारे काम छोड़ दो, पहले वोट दो”। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जब तक युवा घर से बाहर निकलकर मतदान केंद्र तक नहीं पहुंचेगा, तब तक लोकतंत्र की परिकल्पना अधूरी है। उन्होंने प्रथम बार मतदाता बनने वाले छात्रों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया से भी अवगत कराया।
राजनीतिक जागरूकता और निर्वाचन पद्धति का विश्लेषण
राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर महेंद्र नाथ मिश्रा ने भारतीय चुनाव प्रणाली की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ (FPPS) पद्धति की चर्चा करते हुए एक गंभीर तथ्य साझा किया। उन्होंने बताया कि:
”वर्तमान निर्वाचन व्यवस्था में औसतन 55 प्रतिशत मतदान होता है, जिसमें मात्र 20 से 25 प्रतिशत मत प्राप्त करने वाला प्रत्याशी विजयी हो जाता है। यदि हम मतदान का प्रतिशत बढ़ाएं, तो हम और अधिक जन-प्रतिनिधित्व वाली सरकार चुन सकते हैं।”
महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी
महिलाओं की भागीदारी पर केंद्रित संबोधन में डॉ. अल्पना सिंह ने कहा कि देश की आधी आबादी को निर्वाचन प्रक्रिया में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए। वहीं, संस्कृत विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मधुरलता द्विवेदी ने तर्क दिया कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा तभी संभव है जब वे राजनीतिक रूप से जागरूक हों और नीति निर्धारण में अपनी आवाज बुलंद करें।
स्वयंसेवकों की सक्रिय उपस्थिति
इस अवसर पर इतिहास विभाग के अतुल कुमार मिश्रा सहित महाविद्यालय का स्टाफ मौजूद रहा। कार्यक्रम में वैष्णवी मिश्रा, सृष्टि चतुर्वेदी, प्रशांत पाटकर, शिवांश तिवारी, संतोषी गौतम, प्रज्ञा अग्रवाल, कीमती देवी, खुशी, साक्षी, दीपाली, माही, श्यामजी, हार्दिक पटेल, सौम्या बबेले, आयशा गुप्ता, ज्योति कुशवाहा और प्रतिज्ञा उपाध्याय जैसे दर्जनों स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करने की शपथ ली।
अंत में, सभी उपस्थित जनों ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान का संकल्प लेकर कार्यक्रम का समापन किया। यह शिविर न केवल शैक्षिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्वहन की दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित हुआ।

Rahul (रिपोर्टर,जालौन) जालौन जनपद में स्थानीय समाचारों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करते हैं।





