मथुरा प्रसाद महाविद्यालय में एनएसएस शिविर संपन्न: “शिक्षित महिला ही समृद्ध समाज की आधारशिला”

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मथुरा प्रसाद स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोंच के प्रांगण में दिवंगत पूर्व प्राचार्य डॉ. टी.आर.निरंजन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते शिक्षक और शोकाकुल गणमान्य नागरिक

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कोंच (जालौन)। स्थानीय मथुरा प्रसाद महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में आयोजित तृतीय एकदिवसीय सामान्य शिविर गुरुवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवक छात्राओं को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना और समाज में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करना था। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने महिला सशक्तीकरण को केवल एक नारा न मानकर, इसे धरातल पर उतारने के लिए शिक्षा को एकमात्र सशक्त माध्यम बताया।

शिक्षा से ही संभव है दो कुलों का उद्धार

​शिविर का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय विक्रम एवं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी लवकेश कुमार द्वारा किया गया। छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. विजय विक्रम ने महिला सशक्तीकरण की मर्मस्पर्शी परिभाषा साझा की। उन्होंने कहा, “महिलाएं दो कुलों की शोभा होती हैं। उनका जीवन धान की खेती के समान है, जिसका जन्म और लालन-पालन एक स्थान पर होता है, लेकिन वह अपनी सुगंध और उपयोगिता दूसरे घर (ससुराल) में जाकर बिखेरती हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को शिक्षित करना न केवल एक परिवार, बल्कि दो परिवारों के भविष्य को संवारना है।

संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय पर चर्चा

​कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. ओमप्रकाश यादव ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक न्याय के पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाएं राजनीति और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सक्रिय नहीं होंगी, तब तक वास्तविक समानता का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन है। वहीं, डॉ. अल्पना सिंह ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षित महिला ही समाज के विकास की धुरी है। समाज की प्रगति तब तक बाधित रहेगी, जब तक महिलाओं को समान अवसर प्राप्त नहीं होंगे।

रोजगार और स्वावलंबन की राह

​वरिष्ठ शिक्षक महेंद्रनाथ मिश्रा ने छात्राओं को संवैधानिक अधिकारों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि रोजगार और समाज में सम्मानजनक स्थान हासिल करना होना चाहिए। उन्होंने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। डॉ. अर्चना और डॉ. स्वराज्यमणि अग्रवाल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं को अपनी शक्ति को पहचानना होगा और रूढ़िवादी बेड़ियों को तोड़कर आगे बढ़ना होगा।

कार्यक्रम का सफल संचालन और उपस्थिति

​शिविर का कुशल संचालन सृष्टि चतुर्वेदी द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय का स्टाफ और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे। मुख्य रूप से प्रज्ञा अग्रवाल, कीमती देवी, खुशी, साक्षी, संतोषी देवी, वैष्णवी मिश्रा, नैन्सी, राधिका, पूनम, रितिका, मोहिनी, सानिया, महक, बबली देवी, निधि, ख़ुशबू और छात्र स्वयंसेवकों में अभय, आयुष, आर्यन श्रीवास्तव तथा दीक्षा यादव आदि ने सक्रिय सहभागिता की।

निष्कर्ष:

यह शिविर छात्राओं के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि इसने उनमें आत्मविश्वास का संचार भी किया। एनएसएस के इस प्रयास की सराहना करते हुए स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग ने इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक प्रभावी कदम बताया है।

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