पुलिस की ‘थ्योरी’ धराशायी: कोंच में ‘टाइगर’ को नहीं फंसा सकी पुलिस, तो अब लूट के मामले में भेजा जेल; जनाक्रोश भड़का

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी सभासद
कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कोंच कस्बे में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस मामले को पुलिस अपनी ‘साख’ की लड़ाई बना चुकी थी, उसमें कानूनी विफलता मिलने के बाद अब एक जन-प्रतिनिधि (सभासद) को बलि का बकरा बनाने के आरोप लग रहे हैं। ‘छोटू टाइगर’ के खिलाफ अपहरण की कहानी जब कोर्ट और बयानों में टिक नहीं सकी, तो पुलिस ने आनन-फानन में लूट जैसी गंभीर धाराओं का सहारा लेकर उसे जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई ने खाकी की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
क्या था पूरा मामला: ‘टाइगर’ और अपहरण की कहानी
मामले की जड़ें एक प्रार्थना पत्र में छिपी हैं, जिसमें एक परिवार ने छोटू टाइगर नाम के युवक पर लड़की को भगाने का संगीन आरोप लगाया था। पुलिस ने शुरुआत में उसे हिरासत में लिया, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर छोड़ दिया। जैसे ही टाइगर की रिहाई की खबर फैली, स्थानीय हिंदू संगठन उग्र हो गए और सड़कों पर उतर आए। पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुआ और 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया। भारी दबाव के बीच पुलिस ने इसे अपनी नाक का सवाल बना लिया और दावा किया कि वे जल्द ही पुख्ता सबूतों के साथ आरोपी को सलाखों के पीछे भेजेंगे।
पीड़िता के बयानों ने पलटी पुलिस की बाजी
पुलिस को पूरा भरोसा था कि पीड़िता के बयान छोटू टाइगर के खिलाफ होंगे, जिससे अपहरण का मामला मजबूत हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, जब पीड़िता के बयान दर्ज किए गए, तो पूरी कहानी पलट गई। पीड़िता के बयानों में लगाए गए आरोप कानूनी कसौटी पर सिद्ध नहीं हो सके। जिस ‘बड़ी मछली’ को पकड़ने का दावा पुलिस कर रही थी, वह कानूनी रूप से बेगुनाह साबित होने लगी। यहीं से पुलिस की ‘थ्योरी’ कमजोर पड़ने लगी और विभाग पर विफलता का दबाव बढ़ने लगा।
अचानक बदला पैंतरा: ‘अपहरण’ नहीं तो ‘लूट’ ही सही
अपनी साख बचाने और जनता के दबाव को शांत करने के लिए पुलिस ने एक नया और चौंकाने वाला पैंतरा अपनाया। जैसे ही अपहरण का केस ठंडा पड़ा, पुलिस ने छोटू टाइगर (जो कि एक सभासद भी है) पर लूट जैसे गंभीर अपराध का मुकदमा दर्ज कर दिया। आरोप है कि पुलिस ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए आनन-फानन में ऐसी धाराएं जोड़ीं जो आमतौर पर पेशेवर अपराधियों पर लगाई जाती हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई केवल ‘खीझ’ निकालने और आंदोलनकारियों को शांत करने के लिए की गई है।
जनता में भारी उबाल और पुलिस पर गंभीर आरोप
सभासद को जेल भेजे जाने की खबर जैसे ही कोंच में फैली, लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि यदि अपहरण के मामले में सबूत नहीं थे, तो पुलिस को उसे सम्मानपूर्वक छोड़ना चाहिए था, न कि किसी दूसरे मामले में फंसाना चाहिए था। लोगों का आरोप है कि पुलिस अपनी अक्षमता को छिपाने के लिए एक जन-प्रतिनिधि के करियर और सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रही है। कस्बे में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस के खिलाफ लामबंदी तेज हो रही है।
निष्कर्ष: न्याय या केवल खानापूर्ति?
इस पूरे घटनाक्रम ने जालौन पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई छोटू टाइगर अपराधी है, या वह पुलिस की ‘ईगो’ और राजनीतिक दबाव की भेंट चढ़ गया? यह जांच का विषय है। फिलहाल, कोंच की जनता अब उच्चाधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
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