उरई: ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल; अहिल्याबाई होल्कर की विरासत बचाने की मांग

उरई(जालौन): ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और आस्था के प्रतीकों के सम्मान को लेकर जालौन की राजनीति गर्मा गई है। मणिकर्णिका घाट पर हुई कथित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में मांग उठाई है कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित इस ऐतिहासिक धरोहर का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए।
1799 की ऐतिहासिक विरासत पर प्रहार का आरोप
जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 10 जनवरी 2026 को राज्य सरकार के निर्देश पर जिस तरह से मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाया गया, वह न केवल अमर्यादित है बल्कि सनातन संस्कृति और इतिहास का अपमान भी है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि इस घाट का निर्माण सन् 1799 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा कराया गया था। मालवा की महारानी का इस क्षेत्र से गहरा ऐतिहासिक एवं भावनात्मक संबंध रहा है। आरोप है कि इस अंधाधुंध कार्रवाई में घाट की पुरातन संरचना को अपूरणीय क्षति पहुंची है और वहां दबी प्राचीन मूर्तियों व अवशेषों को भी नुकसान पहुंचाया गया है।
ट्रस्ट ने भी जताया विरोध, बढ़ा जनाक्रोश
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अरविंद सेंगर ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से आधारहीन और शर्मनाक है। उन्होंने बताया कि इंदौर स्थित ‘देवी माँ अहिल्याबाई होल्कर चैरिटेबल ट्रस्ट’ ने भी इस कृत्य का कड़ा विरोध किया है, जिससे स्पष्ट होता है कि इस धरोहर का महत्व केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने प्रशासन के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- निष्पक्ष जांच: मणिकर्णिका घाट पर हुई पूरी कार्रवाई की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी अधिकारी या व्यक्ति इसमें दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही हो।
- पुनर्निर्माण: ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट और महारानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति का ससम्मान पुनर्निर्माण कराया जाए।
- विशेषज्ञों की राय: पुनर्निर्माण का कार्य विशेषज्ञों, धर्माचार्यों और स्थानीय इतिहासकारों के मार्गदर्शन में ही संपन्न हो ताकि इसकी प्राचीनता बनी रहे।
आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र अमल नहीं किया गया, तो पार्टी जिला स्तर पर एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने सरकार विरोधी नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया।
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