उरई: मतदाता सूची को शुद्ध बनाने के लिए प्रशासन सख्त, उपजिला निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों के साथ की अहम बैठक

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उरई कलेक्ट्रेट सभागार में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करते उपजिला निर्वाचन अधिकारी संजय कुमार और उपस्थित नेतागण

उरई, (जालौन) लोकतंत्र के महापर्व में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता सुनिश्चित करने और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। शुक्रवार को ‘विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026’ अभियान के अंतर्गत कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। उपजिला निर्वाचन अधिकारी संजय कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जनपद के समस्त मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

​बैठक का मुख्य एजेंडा मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना रहा। उपजिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में अंकित न हो।

विभिन्न फॉर्मों की उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा

​बैठक को संबोधित करते हुए एडीएम संजय कुमार ने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न प्रपत्रों (Forms) की बारीकियों को समझाया। उन्होंने बताया कि निर्वाचन विभाग द्वारा फॉर्म-06, 07, 08, 09, 10 एवं 11 की व्यवस्था की गई है, जिनमें से प्रत्येक का विशिष्ट महत्व है।

​उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा, “18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके प्रत्येक पात्र युवा को फार्म-06 भरना अनिवार्य है। यह हमारा संवैधानिक दायित्व है कि हम यह सुनिश्चित करें कि कोई भी युवा अपने मताधिकार से वंचित न रहे।” उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी आग्रह किया कि वे बूथ स्तर पर अपने एजेंटों के माध्यम से पात्र लोगों को फॉर्म-06 भरने के लिए प्रेरित करें।

फॉर्म-07: आपत्ति दर्ज करने की जटिल प्रक्रिया और सुरक्षा मानक

​बैठक का एक बड़ा हिस्सा फॉर्म-07 की प्रक्रिया को समझने पर केंद्रित रहा। अक्सर आम जनता और कार्यकर्ताओं में इस फॉर्म को लेकर भ्रम की स्थिति रहती है। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए उपजिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि फॉर्म-07 केवल आपत्ति दर्ज करने के लिए है।

प्रमुख शर्तें और नियम:

  1. अधिकार क्षेत्र: फॉर्म-7 केवल वही व्यक्ति भर सकता है जिसका नाम उस विशेष विधानसभा क्षेत्र की निर्वाचक नामावली में पहले से दर्ज हो।
  2. कारणों का उल्लेख: यदि किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में है, या फॉर्म-06 के माध्यम से किसी गलत नाम को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, तो आपत्ति की जा सकती है।
  3. अनिवार्य विवरण: आपत्ति करने वाले को अपना विवरण, विपक्षी का विवरण और आपत्ति का ठोस कारण (जैसे मृत्यु, नागरिकता का अभाव या अन्य स्थान पर नाम होना) देना होगा।

​उन्होंने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि, “केवल फॉर्म-7 भर देने मात्र से किसी का नाम सूची से नहीं कट जाता है। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम-2023 के तहत इसकी गहन जांच की जाती है। साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) अंतिम निर्णय लेते हैं।”

लोकतांत्रिक पारदर्शिता और राजनीतिक दलों की भूमिका

​प्रशासन ने राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। मतदाता सूची में किसी भी प्रकार का संशोधन नियमों के अधीन है और इसमें सुरक्षा के कड़े प्रावधान निहित हैं। इस बैठक के माध्यम से प्रशासन ने राजनीतिक दलों के साथ समन्वय स्थापित कर जमीनी स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने का प्रयास किया है।

बैठक में उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधि

​इस महत्वपूर्ण विमर्श के दौरान जनपद के विभिन्न राजनैतिक दलों के कद्दावर नेता मौजूद रहे, जिनमें:

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): शांतिस्वरूप महेश्वरी
  • समाजवादी पार्टी (SP): राजीव शर्मा
  • बहुजन समाज पार्टी (BSP): भगवती शरण पांचाल
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: कमल
  • सी.पी.आई.एम.: विनोद कुमार

​इन प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के समक्ष अपने सुझाव रखे और मतदाता पुनरीक्षण अभियान में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। अंत में, प्रशासन ने अपील की कि जनपद का प्रत्येक जागरूक नागरिक इस अभियान का हिस्सा बने ताकि एक सशक्त लोकतंत्र की नींव रखी जा सके।

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