खाकी की गुंडागर्दी: जालौन में रक्षक बने भक्षक, विवाद सुलझाने गई डायल 112 की टीम ने युवक को बेरहमी से पीटा, घसीटते हुए ले गए थाने

कदौरा(जालौन): उत्तर प्रदेश में ‘मित्र पुलिस’ का दावा करने वाली खाकी एक बार फिर दागदार हुई है। जालौन जिले के कदौरा थाना क्षेत्र से पुलिस की बर्बरता का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ जनता की सुरक्षा का दम भरने वाले सरकारी नुमाइंदों ने न केवल कानून की मर्यादा लांघी, बल्कि एक युवक को सरेराह जानवरों की तरह पीटकर अमानवीयता की सारी हदें पार कर दीं। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, यह घटना कदौरा थाना क्षेत्र के बबीना बस स्टैंड के समीप की है। बताया जा रहा है कि एक मकान के बंटवारे को लेकर दो सगे भाइयों के बीच काफी समय से विवाद चल रहा था। विवाद ने जब उग्र रूप धारण किया, तो मामले की सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर शांति व्यवस्था कायम करने के लिए डायल 112 की टीम पहुँची थी। लेकिन, आरोप है कि विवाद सुलझाने और न्याय करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने खुद ही कानून हाथ में ले लिया।
सरेराह बर्बरता और वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि डायल 112 के पुलिसकर्मी एक युवक पर टूट पड़े हैं। पुलिसकर्मियों ने युवक को बेरहमी से पीटा और जब उनका मन इतने से भी नहीं भरा, तो वे उसे सड़क पर घसीटते हुए ले गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि युवक रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन वर्दी के नशे में चूर पुलिसकर्मियों का दिल नहीं पसीजा। मौके पर मौजूद भीड़ तमाशबीन बनी रही, जबकि पुलिसकर्मी अपनी ताकत का नंगा नाच दिखाते रहे।
पारिवारिक विवाद में पुलिस की ‘तालिबानी’ कार्रवाई
हैरानी की बात यह है कि पुलिस दो भाइयों के निजी संपत्ति विवाद को सुलझाने गई थी। नियमानुसार, पुलिस को दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर या कानूनी प्रक्रिया के तहत थाने लाना चाहिए था। परंतु, यहाँ पुलिसकर्मियों ने जज और जल्लाद दोनों की भूमिका खुद ही अख्तियार कर ली। एक भाई को निशाना बनाकर जिस तरह से पिटाई की गई, उसने पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशिक्षण पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
प्रशासनिक चुप्पी और जनता का आक्रोश
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। नागरिकों का कहना है कि यदि रक्षक ही इस तरह भक्षक बन जाएंगे, तो आम आदमी न्याय की गुहार लगाने किसके पास जाएगा? इस मामले में अभी तक उच्चाधिकारियों की ओर से किसी बड़ी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग लगातार यूपी पुलिस के आला अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या पुलिस को दी गई शक्तियां आम जनता को प्रताड़ित करने के लिए हैं? फिलहाल, बबीना बस स्टैंड का यह वीडियो जालौन पुलिस की छवि को धूमिल कर रहा है।
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