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मथुरा प्रसाद महाविद्यालय में गूंजा ‘जल ही जीवन है’ का संकल्प; एनसीसी इकाई ने संगोष्ठी के जरिए किया जागरूक

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मथुरा प्रसाद महाविद्यालय कोंच में एनसीसी कैडेट्स और प्रोफेसरों द्वारा जल संरक्षण संगोष्ठी के दौरान शपथ लेते हुए और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए सामूहिक छायाचित्र

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कोंच (जालौन): उरई रोड स्थित प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान, मथुरा प्रसाद महाविद्यालय (MPDC) के परिसर में शनिवार को एनसीसी (NCC) इकाई के तत्वावधान में जल संरक्षण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी को रेखांकित करने वाली एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय बिक्रम सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन और विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ किया गया, जिसने उपस्थित छात्र-छात्राओं और संकाय सदस्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।

कैडेट्स ने प्रस्तुत की जल के महत्व पर वैचारिक रिपोर्ट

​संगोष्ठी के आरंभ में कैडेट रिया ने जल संरक्षण विषय की रूपरेखा और आज के समय में इसकी प्रासंगिकता पर अपना परिचय भाषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए कैडेट रिया ने वर्तमान समय में घटते जल स्तर को भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया। इसी क्रम में कैडेट कंदर्प झां ने मानव जीवन में जल की अपरिहार्यता और उसके दैनिक उपयोग की सीमाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, कैडेट रामजी अग्रवाल ने तकनीकी और पारंपरिक पहलुओं को जोड़ते हुए जल संरक्षण के विभिन्न आधुनिक तरीकों, जैसे ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ और ‘ड्रिप इरिगेशन’ के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की।

लेफ्टिनेंट हरिश्चंद्र तिवारी और प्रोफेसर अतुल मिश्रा के विचार

​एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट हरिश्चंद्र तिवारी ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि जल को बचाना केवल एक व्यक्तिगत कार्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय सेवा है। उन्होंने कैडेट्स को समाज में जल दूत बनकर कार्य करने और हर नागरिक को इस मुहिम से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।

​विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित इतिहास विभाग के प्रोफेसर अतुल कुमार मिश्रा ने आंकड़ों और भौगोलिक स्थितियों के माध्यम से गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने बुंदेलखंड और विदर्भ प्रांतों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे इन क्षेत्रों में जल संकट एक भयावह रूप ले रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कैडेट्स को सचेत किया कि यदि आज हम सचेत नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ेगा।

प्राचार्य की अध्यक्षता में गूंजा रहीम का दोहा; कैडेट्स ने ली शपथ

​अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. विजय बिक्रम सिंह ने हिंदी साहित्य के महान कवि रहीम दास जी के कालजयी दोहे का उल्लेख किया:

“रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून॥”

​डॉ. सिंह ने इस दोहे के माध्यम से बताया कि पानी के बिना जीवन के हर आयाम का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। उन्होंने कैडेट्स को केवल कागजों और संगोष्ठियों तक सीमित न रहकर, जमीन पर काम करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी एनसीसी कैडेट्स और विद्यालय परिवार ने भविष्य में जल की एक-एक बूंद बचाने और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने का सामूहिक संकल्प लिया।

उपस्थिति

​इस अवसर पर मुख्य रूप से कैडेट कशिश वर्मा, गोविंद, विवेक, राजकुमार, नम्रता, साक्षी, दीपाली, अवंतिका सहित बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट्स और महाविद्यालय के शिक्षक व कर्मचारी उपस्थित रहे।

मथुरा प्रसाद महाविद्यालय में गूंजा 'जल ही जीवन है' का संकल्प; एनसीसी इकाई ने संगोष्ठी के जरिए किया जागरूक news image

RAHUL

Rahul (रिपोर्टर,जालौन) जालौन जनपद में स्थानीय समाचारों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करते हैं।

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