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स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर के खिलाफ जालौन में बढ़ा विरोध, मोहल्लेवासियों ने डीएम से लगाई रोक की गुहार

उरई के लहारिया पुरवा क्षेत्र में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर के विरोध में एकत्रित मोहल्लेवासी, हाथों में आवेदन पत्र लिए प्रशासन से मांग करते हुए

प्रीपेड व्यवस्था से बढ़ा आर्थिक बोझ, बिजली कटौती और तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे उपभोक्ता

रिपोर्ट-मुहम्मद साजिद जालौन |UPSAMVAD

उरई(जालौन):जालौन जनपद में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटरों को लेकर जनता का विरोध तेज होता जा रहा है। उरई शहर के लहारिया पुरवा नया पटेल नगर क्षेत्र के निवासियों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को सामूहिक आवेदन सौंपा है। इस आवेदन में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की स्थापना को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नई प्रणाली आम जनता, खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए नई समस्याएं खड़ी कर रही है।


प्रीपेड सिस्टम से बढ़ा आर्थिक दबाव
मोहल्लेवासियों ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया कि प्रीपेड मीटर प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को पहले से बिजली का भुगतान करना पड़ता है। इससे सीमित आय वाले परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
कई परिवारों के लिए एकमुश्त रिचार्ज कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण उन्हें बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। इससे घरेलू जीवन के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतें भी प्रभावित हो रही हैं।


बिजली कटौती से व्यापार और खेती प्रभावित
स्थानीय लोगों ने बताया कि अचानक बिजली कट जाने से छोटे दुकानदारों और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली बंद हो जाती है, जिससे व्यापारिक गतिविधियां बाधित होती हैं।
छोटे व्यापारियों का कहना है कि इस व्यवस्था के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा है और आय में गिरावट आ रही है। वहीं किसानों के लिए सिंचाई कार्य भी प्रभावित हो रहा है।


तकनीकी समझ की कमी बनी बड़ी समस्या
ग्रामीण और बुजुर्ग उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर का उपयोग करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई लोगों को रिचार्ज प्रक्रिया और डिजिटल भुगतान प्रणाली की जानकारी नहीं है।
इसके चलते उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है। डिजिटल साक्षरता की कमी इस नई व्यवस्था को और जटिल बना रही है।


पारदर्शिता पर उठे सवाल
मोहल्लेवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि नई प्रणाली में बिजली खपत और बिलिंग को लेकर पारदर्शिता की कमी है। उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि उनकी कितनी बिजली खपत हुई है और किस आधार पर बैलेंस कट रहा है।
इससे लोगों में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।


पुराने मीटर बहाल करने की मांग, आंदोलन की चेतावनी
आवेदन में मांग की गई है कि जिन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, वहां पुराने पोस्टपेड मीटर दोबारा लगाए जाएं। साथ ही प्रशासन से जनता के साथ संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की गई है।
मोहल्लेवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।


प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस मुद्दे को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
यह मामला न केवल तकनीकी बदलाव का है, बल्कि आम जनता के दैनिक जीवन और आर्थिक स्थिति से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए क्या निर्णय लेता है।

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