जालौन: नगर पालिका की कार्यप्रणाली के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश, कूड़ा टैक्स और गृहकर को लेकर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन | 17 मार्च, 2026 जालौन के नगर क्षेत्र में नगर पालिका प्रशासन की नीतियों और बढ़ते करों के बोझ के खिलाफ नागरिक अब सड़कों पर उतरने लगे हैं। मंगलवार को नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कूड़ा निस्तारण शुल्क, अनियमित गृहकर और शहर की बदहाल बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर एसडीएम (उपजिलाधिकारी) अमित शेखर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों और नगरवासियों का आरोप है कि पालिका प्रशासन जनहित की अनदेखी कर जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है।
कूड़ा टैक्स को बताया ‘अन्यायपूर्ण’, वापस लेने की मांग
ज्ञापन सौंपने पहुंचे एडवोकेट नंदराम पाल और बृजमोहन कुशवाहा ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि नगर पालिका द्वारा घरों से कूड़ा उठाने के लिए प्रति माह 180 रुपये का टैक्स निर्धारित किया गया है। नागरिकों का तर्क है कि एक सामान्य परिवार के लिए यह राशि अत्यधिक और अनुचित है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि सफाई व्यवस्था नगर पालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसके लिए पहले से ही विभिन्न कर लिए जाते हैं, ऐसे में अतिरिक्त कूड़ा टैक्स जनता की जेब पर सीधा डाका है। इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई है।
चुनावी वादों की याद और गृहकर में अनियमितता
नगरवासियों ने पालिका प्रशासन को चुनाव के दौरान किए गए वादों की याद दिलाते हुए ‘सफेद झूठ’ का आरोप लगाया। डॉ. रामकिशोर गुप्ता और आशाराम कुशवाहा ने बताया कि वर्तमान पालिकाध्यक्ष ने चुनाव के समय जनता से वादा किया था कि नगर में लागू अनियमित और भारी गृहकर (House Tax) को संशोधित कर सही किया जाएगा। लेकिन सत्ता में आने के बाद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। आज भी जनता विसंगतिपूर्ण टैक्स बिलों से परेशान है, जिसे दुरुस्त कराना अनिवार्य है।
अतिक्रमण और बदहाल जल निकासी से जनता त्रस्त
नगर की बुनियादी ढांचागत समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए ज्ञापन में कहा गया कि चुंगी नंबर चार के पास जल निकासी के लिए बने नालों पर अवैध रूप से लिंटर डालकर अतिक्रमण कर लिया गया है। इस कारण बारिश और सामान्य दिनों में भी जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो रही है। नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन बिना किसी दबाव के इस अतिक्रमण को ढहाए। इसके साथ ही, पाइपलाइन बिछाने के नाम पर खोदी गई सड़कों को जस का तस छोड़ देने पर भी आपत्ति जताई गई है। जनता की मांग है कि पाइपलाइन डालने के तत्काल बाद सड़कों की मरम्मत कराई जाए ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
बिजली निजीकरण और स्मार्ट मीटर पर उठे सवाल
ज्ञापन में केवल नगर पालिका ही नहीं, बल्कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को भी निशाने पर लिया गया। नागरिकों ने बिजली व्यवस्था के निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की। नरेंद्र वर्मा और छेदालाल प्रजापति ने बताया कि ठेकेदारों के माध्यम से लगवाए जा रहे स्मार्ट मीटर में रीडिंग की गड़बड़ी और अत्यधिक बिल आने की शिकायतें आम हो गई हैं। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली व्यवस्था और मीटरों की जांच कर सुधार नहीं किया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
यातायात और जाम की समस्या
देवनगर चौराहे का जिक्र करते हुए नागरिकों ने बताया कि यहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे एम्बुलेंस और स्कूली वाहनों को निकलने में घंटों लग जाते हैं। ज्ञापन के माध्यम से इस चौराहे पर यातायात पुलिस की तैनाती और सुव्यवस्थित ट्रैफिक व्यवस्था की मांग की गई है।
ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से रामऔतार दोहरे, नरेंद्र वर्मा, छेदालाल प्रजापति समेत दर्जनों लोग उपस्थित रहे। एसडीएम अमित शेखर ने ज्ञापन लेते हुए आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब कर जन समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।







