जालौन: गेहूं खरीद केंद्रों पर डीएम की पैनी नजर, एट मंडी में किसानों से सीधे संवाद कर परखीं व्यवस्थाएं

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जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय एट मंडी में गेहूं क्रय केंद्र का निरीक्षण करते हुए और किसानों से संवाद कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने और गेहूं खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी क्रम में शनिवार को जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने जनपद की एट मंडी परिसर का औचक निरीक्षण किया। यहाँ स्थापित खाद्य विपणन विभाग एवं पीसीएफ (PCF) के गेहूं क्रय केंद्रों पर पहुँचकर उन्होंने धरातलीय हकीकत जानी और अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि किसानों की सुविधा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

व्यवस्थाओं का सूक्ष्म निरीक्षण और पारदर्शिता पर जोर

​निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने क्रय केंद्रों पर तौल मशीनों (कांटों) के मानकीकरण, नमी मापक यंत्रों की कार्यक्षमता और बोरों की उपलब्धता की बारीकी से जांच की। उन्होंने केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक किसान का गेहूं मानक के अनुसार ही खरीदा जाए और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल पोर्टल पर समयबद्ध तरीके से दर्ज किया जाए। जिलाधिकारी ने अभिलेखों के रखरखाव को देखते हुए निर्देश दिए कि ‘प्रथम आगमन-प्रथम सेवा’ के सिद्धांत का कड़ाई से पालन हो, ताकि किसी भी किसान को अपनी बारी के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

किसानों से सीधा संवाद: MSP और सुविधाओं पर चर्चा

​जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने केवल सरकारी फाइलों पर भरोसा न कर, केंद्र पर मौजूद किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने किसानों से पूछा कि क्या उन्हें पंजीकरण या तौल में कोई समस्या आ रही है। किसानों को संबोधित करते हुए डीएम ने कहा:

​”प्रदेश सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। हमारा लक्ष्य है कि बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो और सीधे किसान के बैंक खाते में भुगतान सुनिश्चित हो।”

​उन्होंने मौके पर मौजूद किसानों को भरोसा दिलाया कि यदि कोई भी केंद्र प्रभारी या कर्मचारी अवैध कटौती या अभद्र व्यवहार करता है, तो उसकी सूचना तत्काल तहसील या जिला मुख्यालय पर दी जाए, जिस पर त्वरित कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

ग्राउंड फीडबैक: संतुष्ट नजर आए अन्नदाता

​प्रशासनिक सतर्कता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिलाधिकारी ने केवल मौके पर मौजूद किसानों से ही बात नहीं की, बल्कि उन किसानों को फोन (दूरभाष) भी लगाया जो पिछले दिनों अपना गेहूं बेच चुके थे। डीएम ने फोन पर किसानों से उनके अनुभव और भुगतान की स्थिति के बारे में फीडबैक लिया। अधिकांश किसानों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि केंद्रों पर व्यवस्थाएं सुचारू हैं और पारदर्शिता के साथ खरीद की जा रही है।

मंडी सचिव को बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त करने के निर्देश

​भीषण गर्मी और मौसम के मिजाज को देखते हुए जिलाधिकारी ने मंडी सचिव को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंडी परिसर में किसानों के बैठने के लिए पर्याप्त छाया (टीन शेड), शुद्ध पेयजल की उपलब्धता और बेहतर साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसान अन्नदाता है और उसे केंद्र पर अतिथि जैसा सम्मान मिलना चाहिए। परिसर में साफ-सफाई की कमी पाए जाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर की और तत्काल सुधार के आदेश दिए।

अधिकारियों को सख्त हिदायत

​निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर लक्ष्य की शत-प्रतिशत प्राप्ति के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गेहूं खरीद में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता मिलने पर संबंधित केंद्र प्रभारी और नोडल अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनपद का एक भी पात्र किसान अपनी फसल बेचने से वंचित न रहे।

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