विशेष रिपोर्ट: जालौन में अवैध गुटखा सिंडिकेट का भंडाफोड़; उरई की गलियों में जहर घोल रही हैं बिना लाइसेंस वाली फैक्ट्रियां

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जालौन के उरई में अवैध गुटखा निर्माण इकाई का दृश्य, जहाँ बिना लाइसेंस के तंबाकू मिश्रित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन) :उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और खाद सुरक्षा विभाग की नींद उड़ा दी है। उरई नगर क्षेत्र में लंबे समय से संचालित हो रहे अवैध गुटखा कारोबार का कच्चा चिट्ठा अब सोशल मीडिया के जरिए जनता के सामने आ गया है। आरोप है कि शहर के रिहायशी इलाकों में ‘सुगंधित सुपारी’ की आड़ में जानलेवा तंबाकू मिश्रित गुटखा तैयार कर खुलेआम बाजार में खपाया जा रहा है।

रिहायशी इलाकों में मौत का व्यापार

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, उरई नगर के लल्ला धाम, कुइया रोड और अजनारी जैसे घने बसे इलाकों में यह अवैध धंधा अपनी जड़ें जमा चुका है। इन क्षेत्रों में चोरी-छिपे ऐसी कई इकाइयां स्थापित की गई हैं, जहाँ घटिया दर्जे की सुपारी और प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग कर गुटखा बनाया जाता है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इन फैक्ट्रियों में न तो साफ-सफाई के मानकों का पालन किया जाता है और ना ही इनके पास संचालन हेतु कोई वैध लाइसेंस है।

वायरल वीडियो ने खोली दावों की पोल

​पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर इन अवैध फैक्ट्रियों के संचालन के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर पैकिंग और मिक्सिंग का काम चल रहा है। सबसे गंभीर विषय यह है कि साक्ष्य सार्वजनिक होने के बावजूद अब तक संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस छापेमारी या कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। इस निष्क्रियता ने खाद सुरक्षा विभाग (FSDA) की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

विभाग की ‘मौन स्वीकृति’ पर उठते सवाल

​स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि इतना बड़ा अवैध नेटवर्क बिना विभागीय मिलीभगत के नहीं चल सकता। लोगों का कहना है कि “यह कैसे संभव है कि पुलिस और खाद सुरक्षा विभाग को शहर के बीचों-बीच चल रही इन बड़ी मशीनों की आवाज सुनाई न दे?” चर्चा है कि इस सिंडिकेट को सफेदपोशों और भ्रष्ट अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण शिकायतें फाइलों में ही दफन हो जाती हैं।

जन स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़

​विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अवैध गुटखे में निकोटिन और हानिकारक रसायनों की मात्रा तय मानकों से कहीं अधिक होती है, जो सीधे तौर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को दावत देती है। बिना किसी लैब टेस्टिंग के बाजार में बिकने वाला यह उत्पाद युवाओं और आम जनता के स्वास्थ्य के साथ एक सोची-समझी साजिश है।

प्रशासनिक रुख का इंतजार

​फिलहाल, वायरल वीडियो और मीडिया में खबरें आने के बाद जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे तत्काल एक विशेष टीम (SIT) का गठन कर इन ठिकानों पर छापेमारी करें और दोषियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट जैसी सख्त धाराओं में कार्रवाई करें।

​अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इन ‘मौत के सौदागरों’ पर नकेल कसता है या फिर यह अवैध व्यापार इसी तरह खाद सुरक्षा विभाग की नाक के नीचे फलता-फूलता रहेगा। यू पी संवाद इस मामले की तह तक जाकर हर अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।

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