जालौन में आक्रोश: भाजपा महिला मोर्चा ने किया सपा सांसद कार्यालय का घेराव, मटकियां फोड़कर जताया कड़ा विरोध

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जालौन में सपा सांसद कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करतीं भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता, जमीन पर टूटी हुई मटकियां और फटे हुए सपा के पोस्टर

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन) : उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में आज राजनीतिक पारा उस समय गरमा गया, जब भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने समाजवादी पार्टी के सांसद नारायण दास अहिरवार के उरई स्थित कार्यालय पर धावा बोल दिया। यह उग्र प्रदर्शन महोबा में सपा सांसद द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई कथित अभद्र और विवादित टिप्पणी के विरोध में किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारी महिलाओं ने न केवल सांसद कार्यालय का घेराव किया, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से मटकियां फोड़कर और सपा के पोस्टर फाड़कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

विवादित टिप्पणी पर भड़का गुस्सा

​प्रदर्शन की मुख्य वजह महोबा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सपा सांसद द्वारा देश के प्रधानमंत्री के विरुद्ध इस्तेमाल की गई भाषा को बताया जा रहा है। भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारियों का कहना है कि विपक्ष अपनी मर्यादा भूल चुका है और व्यक्तिगत टिप्पणी पर उतर आया है। कार्यकर्ताओं ने उरई स्थित कार्यालय के बाहर जोरदार नारेबाजी की और अखिलेश यादव व सपा के अन्य नेताओं के खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए।

कार्यालय पर फेंकी मटकियां और फाड़े पोस्टर

​विरोध प्रदर्शन इतना उग्र था कि आक्रोशित महिलाओं ने सांसद कार्यालय के बाहर रखी मटकियां जमीन पर पटक कर फोड़ दीं। इतना ही नहीं, कार्यालय के बाहर लगे समाजवादी पार्टी और सांसद नारायण दास अहिरवार के पोस्टर व बैनरों को उखाड़कर फाड़ दिया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सपा सांसद ने न केवल प्रधानमंत्री का अपमान किया है, बल्कि वे आरक्षण बिल की राह में भी रोड़ा अटका रहे हैं। महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ ऐसी अभद्र टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आरक्षण बिल को लेकर भी विपक्ष पर साधा निशाना

​प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि समाजवादी पार्टी और समूचा विपक्ष महिला आरक्षण और दलितों के हितों से जुड़े बिलों को संसद में बाधित करने का काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सपा पिछड़ों की राजनीति की बात करती है, तो दूसरी तरफ उनके नेता संवैधानिक पदों का अपमान करते हैं। “यह विरोध प्रदर्शन मात्र एक शुरुआत है, यदि माफी नहीं मांगी गई तो यह आंदोलन और भी व्यापक होगा,” एक महिला नेत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा।

पुलिस फोर्स ने संभाला मोर्चा

​हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तत्काल हरकत में आ गया। भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद काफी देर तक नारेबाजी और प्रदर्शन जारी रहा। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत किया और कार्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि स्थिति और अधिक न बिगड़े।

​यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में जिले की राजनीति में और अधिक कड़वाहट पैदा कर सकता है, क्योंकि बीजेपी इसे सीधे तौर पर ‘प्रधानमंत्री के सम्मान’ और ‘आरक्षण विरोधी मानसिकता’ से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।

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