शौर्य और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती पर गूंजा कोंच, विद्यालय में शिक्षकों का सम्मान और ‘माँ’ को समर्पित रहा कार्यक्रम

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कोंच के सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में महाराणा प्रताप की जयंती पर पुष्प अर्पित करती प्रधानाचार्या अर्चना वर्मा, शिक्षकगण और राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगे स्कूली छात्र-छात्राएं

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कोंच (जालौन): वीर शिरोमणि और मेवाड़ की पावन धरा के रक्षक महाराणा प्रताप की जयंती शनिवार को कोंच नगर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में अत्यंत गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई। नगर के सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सरस्वती शिशु मंदिर और शिशु वाटिका में आयोजित विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति और अदम्य साहस का पाठ पढ़ाया गया। समारोह के दौरान जहाँ एक ओर वीरों की गाथाएं गूंजी, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आचार्यों को सम्मानित कर उनके मनोबल को बढ़ाया गया।

प्रतिमा पर माल्यार्पण और शौर्य गाथा का स्मरण

​कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्या अर्चना वर्मा एवं प्रभारी नरेंद्र सिंह सहित अन्य वरिष्ठ शिक्षकों द्वारा महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर ‘जय मेवाड़’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गुंजायमान हो उठा।

​वरिष्ठ आचार्य पंकज बाजपेई ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए महाराणा प्रताप के जीवन के उन अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला, जो उन्हें विश्व का महानतम योद्धा बनाते हैं। उन्होंने बताया कि कैसे विषम परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद महाराणा ने विदेशी आक्रांताओं के सामने कभी घुटने नहीं टेके और अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए घास की रोटियां खाना स्वीकार किया, लेकिन मातृभूमि का सौदा नहीं किया।

प्रधानाचार्या का आह्वान: पदचिन्हों पर चले युवा शक्ति

​प्रधानाचार्या अर्चना वर्मा ने अपने संबोधन में महाराणा प्रताप को शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति की जीती-जागती मिसाल बताया। उन्होंने कहा, “आज के युग में छात्र-छात्राओं को महाराणा प्रताप के अदम्य साहस और वीरता से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। एक महान योद्धा होने के साथ-साथ वह एक ऐसे राष्ट्रभक्त थे, जिन्होंने स्वतंत्रता की लौ को कभी बुझने नहीं दिया। हमें उनके पदचिन्हों पर चलते हुए समाज और देश की उन्नति में अपना योगदान देना चाहिए।”

संस्कृति ज्ञान परीक्षा: कर्मठ आचार्यों का हुआ सम्मान

​समारोह के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों और सामाजिक जुड़ाव पर चर्चा की गई। गत शिक्षण सत्र में आयोजित ‘संस्कृति ज्ञान परीक्षा’ को व्यापक स्तर पर ले जाने और नगर के अन्य विद्यालयों को इस अभियान से जोड़ने के लिए विद्यालय के समर्पित शिक्षकों को मंच पर सम्मानित किया गया। आचार्य मनीष अग्रवाल, अंजना चचोदिया और साधना चतुर्वेदी को उनके उत्कृष्ट नियोजन और परिश्रम के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संचार होता है।

मदर्स डे पर भावुक हुए लोग, ‘माँ’ पर दी प्रस्तुति

​महाराणा प्रताप की जयंती के साथ-साथ विद्यालय में ‘मदर्स डे’ (मातृ दिवस) का भी विशेष आयोजन रहा। शिशु वाटिका की नन्हीं छात्राओं ने ‘माँ’ शीर्षक पर अपनी भावपूर्ण स्पीच (भाषण) प्रस्तुत की। छोटे बच्चों के मुख से माँ की महिमा और उनके त्याग का वर्णन सुनकर वहां मौजूद सभी शिक्षक और अभिभावक भावुक हो गए। बच्चों ने अपनी कविताओं के माध्यम से बताया कि जिस प्रकार महाराणा प्रताप को महान बनाने में उनकी माता जयवंता बाई का योगदान था, उसी प्रकार हर बच्चे के जीवन की पहली गुरु उसकी माँ ही होती है।

​संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन आचार्य सुनील पाठक द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ, शिक्षिकाएं और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, जिन्होंने इस गौरवशाली दिवस को अपनी उपस्थिति से भव्य बनाया।

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