जालौन: उरई तहसील में झांसी एंटी करप्शन टीम का बड़ा धमाका; 10 हजार की रिश्वत लेते कानूनगो रंगे हाथ गिरफ्तार

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जालौन के उरई तहसील परिसर में झांसी एंटी करप्शन टीम द्वारा रिश्वत लेते पकड़े गए कानूनगो और आरोपी को ले जाते हुए पुलिस बल

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन/उरई। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़ी खबर सामने आई है। शुक्रवार दोपहर उरई तहसील परिसर उस समय हड़कंप की स्थिति में आ गया, जब झांसी से आई एंटी करप्शन (भ्रष्टाचार निवारण संगठन) की टीम ने एक सुनियोजित छापेमारी के दौरान कानूनगो और उसके एक सहयोगी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। इस आकस्मिक कार्रवाई ने तहसील के अन्य अधिकारी और कर्मचारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं।

किसान की शिकायत पर बिछाया गया जाल

​प्राप्त विवरण के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई एरी रामपुर के निवासी किसान अनिल कुमार की शिकायत पर आधारित थी। पीड़ित किसान अनिल कुमार का आरोप था कि उरई तहसील में तैनात कानूनगो संदीप तिवारी उनके एक पैतृक कार्य (भूमि संबंधी रिपोर्ट) को आगे बढ़ाने के बदले में 10 हजार रुपये की अवैध धनराशि (रिश्वत) की मांग कर रहे थे।

​किसान ने बार-बार मिन्नतें कीं, लेकिन कानूनगो बिना सुविधा शुल्क के काम करने को तैयार नहीं थे। अंततः परेशान होकर किसान ने झांसी स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो के कार्यालय में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।

तहसील परिसर में मची अफरा-तफरी

​शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एंटी करप्शन टीम ने पहले मामले की प्राथमिक जांच की। आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर टीम ने जाल बिछाया। शुक्रवार दोपहर जैसे ही किसान अनिल कुमार ने तय योजना के मुताबिक कानूनगो संदीप तिवारी को 10 हजार रुपये थमाए, वैसे ही सादे कपड़ों में तैनात एंटी करप्शन की टीम ने घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया।

​इस दौरान कानूनगो के साथ एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया है, जो इस अवैध लेनदेन में संलिप्त बताया जा रहा है। जैसे ही तहसील परिसर में एंटी करप्शन की टीम की धमक हुई, वहां मौजूद वकीलों, कर्मचारियों और आम जनता के बीच अफरा-तफरी मच गई। कई कर्मचारी अपनी सीटों से उठकर इधर-उधर खिसकते नजर आए।

एट थाने में पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया

​गिरफ्तारी के तत्काल बाद टीम दोनों आरोपियों को लेकर एट थाने पहुंची। वहां बंद कमरे में दोनों से गहन पूछताछ की गई। टीम ने रिश्वत के रूप में दिए गए नोटों को बरामद कर लिया है और कानूनगो के हाथों को धुलवाकर साक्ष्य जुटाए गए (फिंगरप्रिंट और कलर टेस्ट)। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

प्रशासनिक खेमे में हलचल

​इस कार्रवाई के बाद पूरे जनपद के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है। तहसील परिसर में दिन भर यह चर्चा का विषय बना रहा कि किस तरह एक छोटे से काम के लिए किसानों का शोषण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने एंटी करप्शन टीम की इस तत्परता की सराहना की है।

टीम का बयान: “भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। किसी भी लोक सेवक द्वारा जनता को परेशान कर रिश्वत की मांग करना दंडनीय अपराध है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा।”

​फिलहाल, कानूनगो संदीप तिवारी और उनके सहयोगी की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रसूख और पद के पीछे छिपकर भ्रष्टाचार करने वाले अब सुरक्षित नहीं हैं। आगामी दिनों में इस मामले में कुछ और विभागीय जांचें होने की भी संभावना जताई जा रही है।

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