ब्रेकिंग जालौन: वन विभाग का ‘करोड़ों’ का खेल! कोंच रेंज में कागजों पर उग आए पौधे, 18 लाख डकारने का आरोप

कोंच(जालौन): उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर प्रदेश को हरा-भरा बनाने के लिए करोड़ों के बजट से वृक्षारोपण अभियान चला रही है, वहीं जालौन जिले के वन विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारी इस अभियान को चूना लगाने में जुटे हैं। मामला कोंच रेंज के बिलहटा और सींगपुरा गांव का है, जहाँ ‘फर्जी पौधारोपण’ का एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। आरोप है कि कागजों पर हजारों पौधे रोपकर सरकारी खजाने से करीब 18 लाख रुपये की बंदरबांट कर ली गई है।
भ्रष्टाचार का मुख्य केंद्र: कोंच रेंज की कारस्तानी
इस पूरे मामले में क्षेत्रीय वन रेंजर पंकज भानु सिंह और उनके करीबी माने जाने वाले वन रक्षक दुर्गेश कुमार मुख्य आरोपी के रूप में उभरे हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन दोनों अधिकारियों ने मिलकर बिलहटा और सींगपुरा गांव के क्षेत्र में फर्जी वृक्षारोपण दिखाया। असल में धरातल पर न तो गड्ढे खोदे गए और न ही पौधे लगाए गए, लेकिन कागजी खानापूर्ति कर लाखों रुपये के बिल पास करा लिए गए।
शिकायत और ‘लीपा-पोती’ का दौर
भ्रष्टाचार का यह जिन्न पिछले साल जुलाई माह में तब बाहर आया, जब मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वन विभाग के उच्चाधिकारियों से की गई। लेकिन, व्यवस्था की विडंबना देखिए कि जाँच के नाम पर भी सिर्फ खेल ही हुआ।
सितंबर माह में जब शिकायतों का दबाव बढ़ा, तो माधौगढ़ रेंजर को इस मामले की जाँच सौंपी गई। आरोप है कि जाँच अधिकारी ने निष्पक्ष जाँच करने के बजाय शिकायतकर्ता पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया। मामला रफा-दफा करने के उद्देश्य से एक भ्रमित रिपोर्ट तैयार की गई और उच्चाधिकारियों को भेज दी गई, ताकि रेंजर पंकज भानु सिंह और वन रक्षक दुर्गेश को बचाया जा सके।
झांसी से पहुंची जांच टीम: क्या खुलेगा राज?
पुरानी जाँच रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद अब झांसी जनपद से आए वन विभाग के एसडीओ (SDO) संतोष कुमार ने मामले की कमान संभाली है। वे अपनी टीम के साथ मौके पर (बिलहटा व सींगपुरा) पहुंचे और धरातलीय स्थिति का मुआयना किया। उन्होंने वृक्षारोपण के लिए आवंटित जमीन, पौधों की संख्या और खर्च हुए बजट से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया।
मीडिया से दूरी और बढ़ता संदेह
जाँच के दौरान जब स्थानीय मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे और एसडीओ संतोष कुमार से जाँच की प्रगति के बारे में जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से स्पष्ट इनकार कर दिया। जाँच अधिकारी की इस चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण और शिकायतकर्ता अब इस आशंका में हैं कि क्या इस बार भी जाँच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या फिर सरकारी धन की लूट करने वाले इन ‘सफेदपोश’ अधिकारियों पर गाज गिरेगी?
जनता की उम्मीदें मुख्यमंत्री पर
जालौन में वन विभाग का यह कोई पहला घोटाला नहीं है, लेकिन 18 लाख रुपये की यह बड़ी रकम सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की लूट है। शिकायतकर्ता ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से निष्पक्ष जाँच और दोषियों की बर्खास्तगी की मांग की है।
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