जालौन: हरियाली बढ़ाने की कवायद तेज, डीएम ने वृक्षारोपण लक्ष्यों को लेकर कलेक्ट्रेट में कसी कमर

उरई (जालौन): जनपद के हरित आवरण को विस्तार देने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा समिति एवं जिला पर्यावरण समिति के कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने आगामी वृक्षारोपण अभियान के लिए अधिकारियों को ‘एक्शन मोड’ में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वर्षाकाल 2026 की पूर्व तैयारी: स्थल चयन के निर्देश
जिलाधिकारी ने आगामी वर्षाकाल 2026 के लिए निर्धारित वृक्षारोपण लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने हेतु अभी से खाका तैयार करने को कहा। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जल्द से जल्द उपयुक्त स्थलों का चयन पूर्ण कर लें और इसकी विस्तृत कार्ययोजना प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) को सौंपें। डीएम ने जोर दिया कि पौधों का रोपण केवल कागजों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि धरातल पर उनकी उपस्थिति और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सत्यापन और जीवितता रिपोर्ट पर सख्त रुख
बैठक में पिछले वर्ष (2025) कराए गए वृक्षारोपण की वर्तमान स्थिति पर भी गहन चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि:
- प्रतिस्थापन: वर्ष 2025 में रोपे गए जो पौधे सूख गए हैं या मृत हो चुके हैं, उनके स्थान पर अनिवार्य रूप से नए पौधों का रोपण कराया जाए ताकि जीवितता का प्रतिशत शत-प्रतिशत बना रहे।
- सत्यापन: नामित सत्यापनकर्ता अधिकारी संबंधित विभागों द्वारा कराए गए वृक्षारोपण स्थलों का मौके पर जाकर निरीक्षण करें।
- डेडलाइन: सत्यापन की विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में तैयार कर 20 जनवरी 2026 तक प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
जीपीडीपी (GPDP) में माइक्रोप्लान को शामिल करने का आदेश
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वृक्षारोपण को व्यवस्थित रूप देने के लिए जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि 02 अक्टूबर से 31 दिसम्बर की अवधि के मध्य जो भी वृक्षारोपण माइक्रोप्लान तैयार किए गए हैं, उन्हें संबंधित ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) में अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाए। इसके लिए जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) और उपायुक्त मनरेगा को समन्वय बनाकर कार्य करने और इसकी सूचना समय से वन विभाग को देने के लिए पाबंद किया गया है।
गंगा संरक्षण और पर्यावरण पर चर्चा
जिला गंगा समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने गंगा की सहायक नदियों और जल स्रोतों के किनारे सघन वृक्षारोपण करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए किनारे पर फलदार और छायादार वृक्षों का होना अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में अधिकारियों की उपस्थिति
बैठक के दौरान प्रशासनिक अमले की भारी मौजूदगी रही। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के.के. सिंह, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संजय कुमार, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नेहा ब्याडवाल, प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) प्रदीप यादव, नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. देवेंद्र भिटौरिया सहित सभी संबंधित विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने अंत में सभी अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि वृक्षारोपण के प्रति उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।






