डिजिटल तकनीक से न्याय की राह हुई आसान: जिलाधिकारी ने वर्चुअल माध्यम से सुनीं फरियादियों की समस्याएं, 27 शिकायतों का मौके पर निस्तारण

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जालौन जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय कलेक्ट्रेट में फरियादियों की समस्याएं सुनते हुए और वर्चुअल माध्यम से अधिकारियों को निर्देश देते हुए

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन): जनमानस की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन अब तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रहा है। इसी क्रम में आज जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई में एक नई पहल करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों के अधिकारियों को वर्चुअल माध्यम से जोड़कर फरियादियों की समस्याओं का सीधा संवाद कराया। प्रातः 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक चली इस मैराथन जनसुनवाई में कुल 27 शिकायतों का मौके पर ही गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया गया।

तकनीक और संवेदनशीलता का अनूठा संगम

​अमूमन जनसुनवाई के दौरान दूर-दराज के गांवों से आए फरियादियों को संबंधित तहसील या ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे। इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए जिलाधिकारी ने समस्त उप जिलाधिकारी (SDM), तहसीलदार, अधिशासी अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) और समाज कल्याण अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जोड़ा।

​जब कोई फरियादी अपनी समस्या लेकर जिलाधिकारी के समक्ष पहुंचा, तो डीएम ने तत्काल संबंधित क्षेत्र के अधिकारी को स्क्रीन पर लेकर समस्या की स्थिति जानी। इससे न केवल समय की बचत हुई, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी मौके पर ही तय हो गई।

प्रमुख विभागों से जुड़ी आईं शिकायतें

​जनसुनवाई के दौरान कलेक्ट्रेट में फरियादियों की भारी भीड़ उमड़ी। प्राप्त शिकायतों में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे छाए रहे:

  • आवास एवं पेंशन: प्रधानमंत्री आवास योजना और वृद्धावस्था/विधवा पेंशन के अटके हुए मामले।
  • भूमि विवाद: चक रोड पर अवैध कब्जे और पैमाइश से संबंधित प्रकरण।
  • पुलिस एवं कानून व्यवस्था: घरेलू विवाद और आपसी रंजिश के मामले।
  • नगर निकाय एवं स्वास्थ्य: साफ-सफाई और चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ी मांगें।

​जिलाधिकारी ने प्रत्येक फरियादी की बात को अत्यंत गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य ध्येय अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय दिलाना है।

कड़ी चेतावनी: लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई

​मौके पर निस्तारित हुई 27 शिकायतों के अतिरिक्त, अन्य शेष प्रार्थना पत्रों को संबंधित विभागों को ऑनलाइन प्रेषित किया गया। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कड़े लहजे में अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखना चाहिए।

​उन्होंने नगर मजिस्ट्रेट को विशेष निर्देश दिए कि वे शेष शिकायतों की नियमित निगरानी (Monitoring) करें और फरियादियों से फोन पर फीडबैक लें कि वे समाधान से संतुष्ट हैं या नहीं। डीएम ने कहा, “जनसुनवाई शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी भी स्तर पर शिकायतों के निस्तारण में टालमटोल या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

पारदर्शिता की ओर बढ़ते कदम

​इस वर्चुअल जनसुनवाई से आम जनता में विश्वास बढ़ा है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने प्रशासन की इस पहल की सराहना की, क्योंकि उनकी शिकायतों पर अब लखनऊ या जिला मुख्यालय से सीधे नजर रखी जा रही है। जिलाधिकारी की इस सक्रियता ने जनपद के प्रशासनिक अमले में भी हलचल पैदा कर दी है, जिससे लंबित पड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

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