गौवंशों की दुर्दशा देख भड़कीं एसडीएम: कोंच की तीन गौशालाओं में मिली भारी अव्यवस्था, देवगांव में बदहाली पर लगाई कड़ी फटकार

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कोंच एसडीएम ज्योति सिंह गौशाला का औचक निरीक्षण करते हुए

कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल गौ-संरक्षण अभियान को स्थानीय स्तर पर किस तरह पलीता लगाया जा रहा है, इसकी बानगी सोमवार को देखने को मिली। कोंच की उपजिलाधिकारी (एसडीएम) ज्योति सिंह ने जब तहसील क्षेत्र की तीन प्रमुख गौशालाओं का औचक निरीक्षण किया, तो वहां की बदहाली देखकर वह दंग रह गईं। देवगांव, फुलैला और जुझारपुरा गौशालाओं की जांच के दौरान पशुओं के रखरखाव और चारे-पानी की व्यवस्था में गंभीर खामियां उजागर हुईं, जिस पर एसडीएम ने संबंधित जिम्मेदारों की जमकर क्लास ली।

देवगांव गौशाला: कीचड़ और गंदगी का अंबार

​सोमवार को एसडीएम ज्योति सिंह और क्षेत्राधिकारी (सीओ) परमेश्वर प्रसाद लाव-लश्कर के साथ सबसे पहले देवगांव स्थित गौ-आश्रय केंद्र पहुंचे। यहाँ का नजारा बेहद विचलित करने वाला था। निरीक्षण के समय गौशाला में कुल 75 गौवंश मौजूद थे, लेकिन उनके रहने की जगह पूरी तरह नरकीय बनी हुई थी। पूरे परिसर में भारी कीचड़ और गंदगी का बोलबाला था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि कई दिनों से यहाँ साफ-सफाई की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

​एसडीएम ने मौके पर पाया कि गौवंशों के बैठने के लिए कोई सूखी जगह उपलब्ध नहीं थी। कीचड़ के बीच बेसहारा पशु खड़े होने को मजबूर थे। जल निकासी का प्रबंध न होने के कारण स्थिति और भी बदतर हो गई थी। इस घोर लापरवाही को देख एसडीएम का पारा चढ़ गया और उन्होंने वहां मौजूद केयरटेकर को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर किन परिस्थितियों में पशुओं को इस गंदगी में रखा जा रहा है।

चारे और भूसे का संकट

​गंदगी के अलावा दूसरी बड़ी लापरवाही गौवंशों के भोजन को लेकर सामने आई। जांच के दौरान एसडीएम ने जब भूसे के स्टॉक का मिलान गौवंशों की संख्या से किया, तो भारी अंतर देखने को मिला। नियमानुसार जितने पशु वहां मौजूद थे, उस हिसाब से भूसे की उपलब्धता काफी कम पाई गई। एसडीएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि गौवंशों के चारे में किसी भी प्रकार की कटौती या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि गौवंशों की देखरेख के लिए पर्याप्त स्टाफ या सजगता मौके पर नहीं दिखी।

एक सप्ताह का अल्टीमेटम: “सुधर जाओ वरना होगी कार्रवाई”

​देवगांव के बाद एसडीएम ने फुलैला और जुझारपुरा गौशालाओं का भी बारीकी से निरीक्षण किया। वहां भी व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं मिलीं। प्रशासनिक अधिकारियों की इस संयुक्त कार्रवाई से गौशाला संचालकों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।

​एसडीएम ज्योति सिंह ने मौके पर ही सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि गौशालाओं की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए केवल एक सप्ताह का समय दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सात दिनों के भीतर अगर जल निकासी दुरुस्त नहीं हुई, साफ-सफाई का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया और पर्याप्त मात्रा में चारे-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो केयरटेकर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

पशु क्रूरता पर सख्त रुख

​सीओ परमेश्वर प्रसाद ने भी निरीक्षण के दौरान सुरक्षा और पशुओं की स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शासन से बजट मिलने के बावजूद यदि गौवंशों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तो इसे सीधे तौर पर सरकारी कार्य में लापरवाही और पशु क्रूरता माना जाएगा।

​इस निरीक्षण के बाद अब क्षेत्र के अन्य गौशाला संचालकों में भी खलबली मची हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अक्सर कागजों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाई जाती हैं, लेकिन धरातल पर एसडीएम के निरीक्षण ने सच्चाई की पोल खोल दी है। अब देखना यह होगा कि एक सप्ताह के अल्टीमेटम के बाद इन बेसहारा पशुओं की किस्मत बदलती है या व्यवस्था फिर से ढाक के तीन पात साबित होती है।

रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, जालौन |UP SAMVAD
Source: Local Sources

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