जालौन: छोटी नदियों के पुनरोद्धार से लौटेगी खुशहाली, ‘जल शक्ति जन भागीदारी-2.0’ के तहत डीएम ने तैयार किया मास्टर प्लान

उरई (जालौन): बढ़ते जल संकट और गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए केंद्र व राज्य सरकार के ‘जल शक्ति अभियान’ को जालौन में एक नई गति मिलने वाली है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जल शक्ति जन भागीदारी–2.0 (JSJB-2.0) 2026 की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु जनपद की विलुप्त होती छोटी नदियों का पुनरोद्धार और जल संरक्षण की संरचनाओं को सुदृढ़ करना रहा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जल ही जीवन का आधार है और इसके संरक्षण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नदियों के स्रोत से संगम तक होगा कायाकल्प
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद की सभी छोटी व सहायक नदियों के साथ-साथ उनसे जुड़े नालों का गहन सर्वेक्षण किया जाए। नदियों को उनके उद्गम स्थल (स्रोत) से लेकर बड़ी नदियों में मिलने वाले संगम तक पूरी तरह चिन्हित किया जाएगा।
प्रशासन का लक्ष्य है कि जल प्रवाह में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लेकर डी-सिल्टेशन (सफाई), चैनलाइजेशन और कोर्स करेक्शन (धारा सुधार) जैसे कार्य युद्ध स्तर पर कराए जाएंगे। इससे न केवल नदियों में जल स्तर बढ़ेगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों का भू-जल स्तर भी सुधरेगा।
बसंत पंचमी से शुरू होगा तालाबों का जीर्णोद्धार
जिलाधिकारी ने जल संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद के बड़े आकार के तालाबों को चिन्हित कर उनके पुनरुद्धार का कार्य बसंत पंचमी के शुभ अवसर से प्रारंभ किया जाए। इसमें सरकारी मशीनरी के साथ-साथ आम जनता की भागीदारी (Public Participation) सुनिश्चित की जाएगी। पिछले वर्ष नून नदी के सफल जीर्णोद्धार का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जनसहयोग से बड़े बदलाव संभव हैं। नून नदी के शेष भाग के पुनरोद्धार हेतु जागरूकता पैदा करने के लिए आगामी 25 जनवरी 2026 को एक विशाल ‘पदयात्रा’ का आयोजन भी किया जाएगा।
चेकडैम और वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर
केवल नदियों की सफाई ही नहीं, बल्कि जल को रोकने और जमीन के अंदर भेजने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। जिलाधिकारी ने नदियों के किनारों पर मृदा एवं जल संरक्षण से संबंधित कार्यों जैसे चेकडैम, वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, रपटा और छोटे बांधों के निर्माण को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि इन कार्यों में देरी का मतलब भविष्य के जल संकट को बुलावा देना है, इसलिए सभी विभाग समयबद्ध तरीके से लक्ष्य पूरा करें।
इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद मौर्य सहित जल निगम, लघु सिंचाई और राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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