जालौन: गौशाला की लापरवाही से अन्नदाता बेहाल; कालपी में आवारा गौवंशों ने रौंदी किसानों की फसलें, डीएम से मुआवजे की गुहार

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जालौन के कालपी में गौशाला की बदहाली और खेत में आवारा गायों द्वारा नष्ट की गई मूंग व चरी की फसल को दिखाते हुए हताश ग्रामीण और किसान

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन (कालपी)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बेसहारा गौवंशों के संरक्षण और किसानों की फसलों की सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर गौशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों और जिम्मेदारों की लापरवाही इन योजनाओं को तार-तार कर रही है। ताजा मामला जालौन जिले के कालपी तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खल्ला (ग्राम पंचायत खाकरी) से सामने आया है, जहां सरकारी गौशाला की बदहाल व्यवस्था और कर्मचारियों की घोर लापरवाही के कारण दर्जनों किसानों की मेहनत से तैयार फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं। त्रस्त और आक्रोशित ग्रामीणों ने अब इस मामले में जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है।

​रात के अंधेरे में खेतों पर धावा बोल रहे हैं बेसहारा गौवंश

​ग्राम खल्ला के स्थानीय निवासियों और पीड़ित किसानों का आरोप है कि गांव में संचालित अस्थाई गौशाला का रख-रखाव और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। गौशाला के रखवाले और जिम्मेदार अधिकारी अपनी ड्यूटी के प्रति गंभीर नहीं हैं। स्थिति यह हो गई है कि हर दिन सूर्यास्त के बाद, रात के अंधेरे में भारी संख्या में गायें और अन्य गौवंश गौशाला के टूटे बाड़े से बाहर निकल जाते हैं। इसके बाद यह झुंड सीधे किसानों के लहलहाते खेतों का रुख करता है। रात भर फसलों को रौंदने और चरने के कारण सुबह तक किसानों की महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल जाती है।

​पेशगी पर जमीन लेकर की थी खेती, ७० फीसदी फसल नष्ट होने से रो पड़ा किसान

​गौशाला प्रबंधन की इस लापरवाही का सबसे दर्दनाक असर गांव के छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है। बीते दिनों रात के समय गौशाला से छूटे गौवंशों के एक बड़े झुंड ने एक स्थानीय किसान के खेत पर धावा बोल दिया। देखते ही देखते गायों ने लगभग एक बीघा में बोई गई चरी और दो बीघा क्षेत्र में लगी मूंग की नकदी फसल को पूरी तरह चरकर नष्ट कर दिया।

​पीड़ित किसान ने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि उसके पास खुद की पर्याप्त जमीन नहीं है। उसने कर्ज और पेशगी (बटाई/किराए) पर जमीन लेकर इस उम्मीद में खेती की थी कि फसल बेचकर परिवार का भरण-पोषण करेगा और कर्ज चुकाएगा। लेकिन इस घटना के बाद उसकी करीब 70 प्रतिशत फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। किसान के सामने अब अपने परिवार की आजीविका चलाने और आर्थिक संकट से निपटने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।

​ग्रामीणों में आक्रोश; सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से प्रशासन में हड़कंप

​यह समस्या केवल किसी एक व्यक्तिगत किसान तक सीमित नहीं है। खाकरी ग्राम पंचायत के दर्जनों किसानों की फसलें पिछले कुछ हफ़्तों में इसी तरह आवारा पशुओं की भेंट चढ़ चुकी हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया।

​ग्रामीणों ने गौशाला की बदहाली, टूटी सीमाओं और खेतों में घूमते पशुओं का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर जिला प्रशासन की तीखी आलोचना हो रही है।

क्या कहते हैं ग्रामीण?

“गौशाला सिर्फ नाम की बनी है, रात होते ही गेट खोल दिए जाते हैं या गायें खुद बाहर निकल आती हैं। हमारी रात की नींद हराम हो गई है। अगर प्रशासन ने जल्द ही इसका पुख्ता इंतजाम नहीं किया और हमें मुआवजा नहीं मिला, तो किसानों के पास आत्मघाती कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

संदीप विश्वकर्मा, स्थानीय ग्रामीण व समाजसेवी

​जिलाधिकारी से औचक निरीक्षण और मुआवजे की मांग

​लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान से परेशान और आक्रोशित ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी जालौन, राजेश कुमार पांडेय को एक औपचारिक शिकायती पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  1. औचक निरीक्षण: जिलाधिकारी स्वयं या किसी वरिष्ठ अधिकारी की टीम भेजकर खाकरी ग्राम पंचायत की गौशाला का औचक निरीक्षण करवाएं और वहां की कमियों को दूर करें।
  2. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: गौशाला की बाउंड्रीवॉल और द्वारों को दुरुस्त किया जाए ताकि रात में पशु बाहर न आ सकें।
  3. फसल मुआवजा: राजस्व विभाग की टीम (लेखपाल और कानूनगो) को मौके पर भेजकर नष्ट हुई फसलों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और पीड़ित किसानों को तुरंत उचित सरकारी मुआवजा दिलाया जाए।

​ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि स्थानीय प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया, तो क्षेत्र के समस्त किसान उग्र आंदोलन और धरने के लिए विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस वायरल वीडियो और किसानों की इस चित्कार पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है।

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